Category: Literature
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🌿 विश्व जैव विविधता दिवस
जब धरती थक जाती है,और हवाएँ मौन हो जाती हैं,तब कुछ वृक्ष चुपचापजीवन का दीप जलाते हैं। वटवृक्ष अपनी विशाल बाँहों मेंधरती को छाँव देता है,और पीपल अपनी हर पत्ती सेजीवन का गीत सुनाता है। ये केवल वृक्ष नहीं,प्रकृति की धड़कन हैं,जहाँ पक्षियों के घर बसते हैं,और हर जीव को अपना आसमान मिलता है। इनकी…
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प्रफुल्ल भाई पटेल ने जन्म दिन पर नि:शुल्क घोंसला वितरित कर बनाई पहचान
हिम्मतनगर / यह कहानी है गुजरात राज्य के अरवली जिले के साढंबा के पास में आए हुए एक छोटे से गांव दोलपुरा में जन्मे प्रफुल्ल भाई पटेल की उनको बचपन से ही पंछियों के प्रति लगाव था। जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे-वैसे पंछियों के प्रति उनका प्यार बढ़ता गया। पंछियों के लिए कुछ करना है…
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सपनों को पंख देना मैंने गौरैया से सीखा : आशा प्रसाद
गौरैया संरक्षक /आशा प्रसाद : बिहार, पटना, के अंबेडकर पथ की आशा प्रसाद जो आम्रपाली इनर व्हील क्लब की प्रेसिडेंट रही हैं। जो पिछले 6 सालों से “Save Sparrow” प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया है। शुरुआत में मेरे घर पर सिर्फ़ तीन या चार गौरैया आती थीं। वे बताती हैं कि छह महीने की…
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कविता ‘गौरैया’
गौरैया,आँगन की रौनक” – डॉ.अश्वनी नन्ही सी चिड़िया, प्यारी सी गौरैया,आँगन की रौनक, खुशियों की छैया।चहचहाती थी जो हर सुबह-सवेरे,अब क्यों हो गई दूर हमसे धीरे-धीरे?छतों के कोने, दीवारों की दरार,वहीं था उसका छोटा सा संसार।पर कंक्रीट के जंगल, मोबाइल की तरंग,ले गई उसकी खुशियों के सब रंग।आओ मिलकर एक प्रयास करें,उसके लिए फिर से…
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*कहानी “दो गौरैया” – भीष्म साहनी
घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं-मां, पिताजी और मैं। पर पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है। हम तो जैसे यहां मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं। आंगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं। जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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