Category: Blog
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गौरैया एक पत्नीक होती है
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया के रोचक पक्षी है। जो इंसान के बेहद करीब और कई मायने में मिलती – जुलती छवि लिए रहती है। गौरैया एक पत्नीक होती हैं, और वे अपने साथी के साथ एक मजबूत बंधन बनाती हैं। साथ ही वे अपने घोंसले के स्थान से भी बहुत जुड़ी हुई होती हैं। प्रजनन…
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गौरैया संरक्षण के लिए कानूनी ढाल है वन्यजीव(संरक्षण)अधिनियम
संजय कुमार/ घर-आँगन में चहकने-फुदकने, बचपन की साथ और किसान मित्र घरेलू गौरैया के संरक्षण को लेकर भारत में कोई अलग से ‘गौरैया अधिनियम’ यानि कानून नहीं बना है, लेकिन इसे भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव कानून और विभिन्न सरकारी पहलों के माध्यम से कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है। खेतों में बढ़ता कीटनाशक का…
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गौरैया एक सर्वहारा पक्षी है मांसाहारी नहीं
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया एक सर्वाहारी पक्षी है। मांसाहारी जीव नहीं है। इसके आहार में किट,पतंगा शामिल है। खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों का भक्षण करना गौरैया पसंद करती है और उसे अपने बच्चों को भी खिलाती हैं। साथ ही इन्सान के घरों में प्रवेश कर अनाज के साथ कीड़े-मकोड़े को खाती…
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लौट आओ नन्हे दोस्त गौरैया
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया और इंसान की दोस्ती नई नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी है। इन्सान जहाँ-जहाँ गया पीछे-पीछे नन्ही गौरैया उसके घर-आँगन या आसपास चली आई और साथ-साथ रहने लगी। बच्चों का बचपन उसके साथ गुजरा, तो खेतों में लगी फसलों एवं बाग़-बगीचा के फल-फूल-सब्जी को नुकसान पहुँचाने वाले कीड़ों को अपना आहार बना…
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गौरैया के लिए मोबाइल फोन टावर कितना खतरनाक ?
संजय कुमार/ घरेलू गौरैया की संख्या में कमी के पीछे के कारणों में एक बड़ा कारण मोबाइल टावरों से निकलने वाला रेडिएशन को बताया जाता है। स्टेट ऑफ इंडियंस बर्ड्स ने इसे पुख्ता सबूत नहीं माना है। जबकि गौरैया की संख्या में कमी के पीछे आहार की कमी, बढ़ता आवासीय संकट, कीटनाशक का व्यापक प्रयोग,…
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गौरैया: नेचुरल कीटनाशक है
संजय कुमार / गौरैया कीट-पतंगे खाकर किसानों की मदद करती है। एक गौरैया एक दिन में कई कीड़े खा जाती है। इसके आहार में 60 प्रतिशत हिस्सा कीड़े होते हैं। खासकर बच्चों को प्रोटीन के लिए कैटरपिलर, कीड़ा-मकोड़ा, गमला या मिटटी में लगे छोटे कीड़े आदि ही खिलाती है। खेतों में फसल और सब्जी में…
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अब विज्ञापन में भी ‘गौरैया’
संजय कुमार/सिनेमा, साहित्य, लोक गीत कला-कथा के बाद अब विज्ञापन में भी गौरैया नजर आने लगी है। कई शहर-गाँव-मोहल्ला के घर-आँगन में चहकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया के साथ गायब या विलुप्ति जैसे शब्द जुड़ चुकें है तो वही, उसकी घर वापसी के लिए संरक्षण अभियान भी जोरशोर से चल रहा है। और,सफलता भी मिल…
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गौरैया की डोर काटती पतंग-चाइनीज मांझा
संजय कुमार / गौरैया / पतंग की डोर मजबूत हो उसके लिए चाइनीज मांझा यानि लेड कोडेड नायलॉन/सिंथेटिक धागा जहाँ अपनी अत्यधिक मजबूती और धार के कारण दूसरे पतंग की डोर काट रहा है वही, गौरैया, कबूतर, मोर सहित अनगिनत पक्षियों के जीवन की डोर को काट, उनके लिए ‘काल’ बना हुआ है। यह धागा…
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कम हो रही है गौरैया की आबादी?
संजय कुमार/ गौरैया / घर-आँगन, छत और मुंडेर पर बैठ चींचीं करने वाली गौरैया आज कहीं दिखती है, तो कहीं एक दम से नहीं दिखती है। पर्यावरणविदों के लिए गौरैया का गायब होना चिंता का विषय है कि पिछले कुछ दशकों में गौरैया की आबादी में 60% से 80% तक की भारी गिरावट देखी गई…
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प्रकृति के संग लद्दाख की गौरैया ‘चिपा ग्याओ’
संजय कुमार/ गौरैया / केंद्र शासित राज्य लद्दाख के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में ‘चिपा ग्याओ’ पाई जाती है। लद्दाख में घरेलू गौरैया को दिलचस्प नाम ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारा जाता है। हिमायल रेंज की पहाड़ियों से घिरे लद्दाख के लोग भले ही घरेलू गौरैया को ‘चिपा ग्याओ’ से पुकारते हैं लेकिन…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
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www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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