31 जल संरक्षकों को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान–2026’

नई दिल्ली। जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले देशभर के जल संरक्षकों को सम्मानित करने के लिए सातवें ‘जल प्रहरी सम्मान समारोह–2026’ का आयोजन 23 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में किया गया। समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित जल संरक्षण के…

नई दिल्ली। जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले देशभर के जल संरक्षकों को सम्मानित करने के लिए सातवें ‘जल प्रहरी सम्मान समारोह–2026’ का आयोजन 23 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में किया गया। समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित जल संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तियों एवं संगठनों को सम्मानित किया गया। इस वर्ष के सम्मान के लिए नामांकन प्रक्रिया के माध्यम से 31 जल संरक्षकों का चयन किया गया था।

जल प्रहरी निर्णायक मंडल के अध्यक्ष भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई हैं। जल प्रहरी के संयोजक अनिल सिंह ने बताया कि इस सम्मान का उद्देश्य देशभर में जल संरक्षण, पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन, नदियों एवं तालाबों के संरक्षण और जनभागीदारी के माध्यम से जल सुरक्षा के लिए कार्य कर रहे जल योद्धाओं के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।

कार्यक्रम में डॉ. राजभूषण चौधरी, अरुण सिंह, भाजपा सांसद, पर्यावरण गतिविधि प्रमुख गोपाल आर्य, राजेंद्र सिंह, उमा शंकर पांडे तथा यूएनईपी और आईआईटी कानपुर से जुड़े प्रतिनिधियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह में कई पद्मश्री सम्मानित विभूतियों, पर्यावरणविदों, जल विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट अतिथियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने तथा भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

आयोजन समिति के सदस्य अमन वशिष्ठ ने बताया कि जल प्रहरी सम्मान के माध्यम से अब तक अनेक आईएएस, आईपीएस एवं आरएएस अधिकारियों, गैर-सरकारी संगठनों, किसानों और जमीनी स्तर पर जल संरक्षण के लिए कार्य करने वाले व्यक्तियों के योगदान को सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के प्रयासों को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

उत्तर प्रदेश से छह जल संरक्षकों का चयन

उत्तर प्रदेश से इस वर्ष छह जल संरक्षकों का चयन किया गया। इनमें अजय क्रांतिकारी, अक्षय नायक, आरजे डॉ. मीनू खरे (लखनऊ), डॉ. पवन कुमार, संदीप चौधरी और संजय कुमार शामिल हैं।

राज्यवार चयनित जल संरक्षक

राजस्थान (5)

  1. अनीता पालीवाल
  2. भूपेंद्र पालीवाल
  3. दशरथ शर्मा एवं रामेश्वर लाल
  4. गेमर सिंह, महेंद्र सिंह एवं तनेराव सिंह
  5. सुरेशपाल जादौन

उत्तर प्रदेश (6)

  1. अजय क्रांतिकारी
  2. अक्षय नायक
  3. डॉ. मीनू खरे (लखनऊ)
  4. डॉ. पवन कुमार
  5. संदीप चौधरी
  6. संजय कुमार

मध्य प्रदेश (3)

  1. मिलिंद पंडित एवं स्वाति संवत्सर
  2. राजीव शर्मा
  3. सावित्री श्रीवास्तव

गुजरात (2)

  1. आनंदभाई एन. जाट
  2. दिलीपभाई साखिया

दिल्ली (2)

  1. एमसीटी परेवा
  2. विनय दास

महाराष्ट्र (1)

  1. आदित्नाथ गोरखनाथ

झारखंड (1)

  1. अंकित कुमार एवं दिलीप कुमार
    इसके अलावा पंजाब, पश्चिम बंगाल के जल प्रहरी भी शामिल हुए ।
    जल प्रहरी सम्मान का उद्देश्य जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों और संगठनों को प्रोत्साहित करना तथा समाज में जल के प्रति जिम्मेदारी, जागरूकता और सामूहिक भागीदारी की भावना को मजबूत करना है। यह पहल ‘जल आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प को आगे बढ़ाने और जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन