पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए संजय को मिला ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में आयोजित “7वें जल प्रहरी सम्मान 2026” समारोह में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरुष–पर्यावरणविद डॉ.राजेन्द्र सिंह के द्वारा पर्यावरण सह जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार के संजय कुमार को ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’ दिया गया। संजय कुमार विशेष…
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। नई दिल्ली स्थित विश्व युवक केंद्र में आयोजित “7वें जल प्रहरी सम्मान 2026” समारोह में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित जलपुरुष–पर्यावरणविद डॉ.राजेन्द्र सिंह के द्वारा पर्यावरण सह जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार के संजय कुमार को ‘जल प्रहरी सम्मान 2026’ दिया गया। संजय कुमार विशेष रूप से गौरैया संरक्षण के साथ-साथ और पर्यावरण संरक्षण से लम्बे समय से सक्रिय हैं। जल और पर्यावरण संरक्षण पर संजय कुमार की पुस्तक “जल-जीवन-हरियाली” प्रकाशित हो चुकी है।
‘जल प्रहरी’ के संयोजक अनिल सिंह सागर ने बताया कि जल सह पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों के समर्पण और जल-सुरक्षित भारत के निर्माण की दिशा में किए गए प्रयासों के सम्मान में यह सम्मान प्रदान किया जाता है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) और राज्यसभा सांसद, जूरी अध्यक्ष के रूप में थे। समारोह में देशभर के अन्य चयनित जल प्रहरियों को भी सम्मानित किया गया।
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारागौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
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