फिल्मों में जीवन की राह दिखाती गौरैया

संजय कुमार / इंसानों के बीच रहने वाली विलुप्ति या गायब की कहानी बनी नन्ही चिड़िया गौरैया को साहित्य में बहुत स्थान मिला है। लोकगीतों में भी गौरैया ने स्थान पाया है। घर आंगन में फ़ुदकने वाली गौरैया को कहानी-कविता-गीत–संगीत में पिरो कर जीवंत किया गया है। देखा जाए तो साहित्य में गौरैया का विशेष…

संजय कुमार / इंसानों के बीच रहने वाली विलुप्ति या गायब की कहानी बनी नन्ही चिड़िया गौरैया को साहित्य में बहुत स्थान मिला है। लोकगीतों में भी गौरैया ने स्थान पाया है। घर आंगन में फ़ुदकने वाली गौरैया को कहानी-कविता-गीत–संगीत में पिरो कर जीवंत किया गया है। देखा जाए तो साहित्य में गौरैया का विशेष स्थान है। साहित्य के बाद देखें तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी गौरैया को महत्वपूर्ण जगह मिली है, लेकिन  ज्यादा नहीं। जय भीम, गमनम, सूरराई पोटरू  यानि उड़ान, बिंबिसार, मेका सुरी,  2।0,  पीटर रैबिट  सहित  अन्य  फ़िल्मों  में  गौरैया  को  जगह  मिली  है।

दक्षिण की फिल्मों में गौरैया

दक्षिण की कई भाषाओं  और  हिंदी में डब  जय भीम में  गौरैया को किसान मित्र के तौर पर दिखाया गया है , और लोग भी ख्याल रखते है।  2021 में बनी जय भीम फ़िल्म, भारतीय तमिल भाषा की फ़िल्म है। यह टी।जे। ज्ञानवेल द्वारा निर्देशित और 2डी एण्टरटेनमेण्ट द्वारा निर्मित है। फ़िल्म में साउथ के सुपरस्टार सूर्या, प्रकाश राज, राजिशा विजयन, लिजोमोल जोस, राव रमेश और के। मणिकन्दन मुख्‍य भूमिकाओं में हैं। जो,1993 की एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म है। फिल्म की कहानी सिंघनी और राजकन्नू नामक ईरुला आदिवासी जोड़े के जीवन और उन पर पुलिस की ज्‍यादतियों पर आधारित है। फ़िल्म के दृश्य में ग्रामीण परिवेश को दिखाया गया है, और खेत में काम कर  रहे  किसान,खेतिहर मजदूर और उसके परिवार के लोग। अनाज को बर्बाद करने वाले चूहों का शिकार तो वहीं, किसान  मित्र  गौरैया  के  झुंड  का खेत के ऊपर मंडराना  और  किसान  के  बच्चे  द्वारा  डाले गए दाने को झुंड में आकर चुगना अद्भुत दृश्य  है।  यह दृश्य  गौरैया  संरक्षण  को  दिशा  देता  दिखता  है।

 तेलुगु फ़िल्म  ‘गमनम’ में  गौरैया को जीवनदाता के रूप में पेश किया गया है। फिल्म निर्माता रमेश करुटूरी, वेंकी पुषदापु और ज्ञान शकर वी.एस बखूबी ने फिल्म में तीन कहानियों का संकलन किया है। एक कहानी एक महत्वाकांक्षी क्रिकेटर के बारे में है जो भारत के लिए खेलना चाहता है। दूसरी कहानी एक शिशु की मां की है, जो अपने पति के भारत लौटने की प्रतीक्षा कर रही है और आखरी कहानी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों की दिल दहला देने वाली है। शहर में बाढ़ तीनों कहानियों को अंतिम मोड़ देती है। फ़िल्म में गौरैया दूसरी और तीसरी कहानी में  दृश्यबद्ध है। झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को गौरैया के संग खेलते दिखाया गया। बच्चे टोकरी के ज़रिये गौरैया को फँसाते है और फिर उड़ाते हुए खुश हो जाते हैं। वहीं, एक महत्वपूर्ण दृश्य है। शहर, जब बाढ़ के आगोश में आ जाता है तब नायिका नींद से सुबह उठती है तो घर (एक कमरे का) में पानी भरा देखती है धीरे-धीरे कमरे में पानी भरने लगता है और वह अपने शिशु संग डूबने लगती है। दरवाजा भी नहीं खुलता और कोई मदद के लिए भी  नहीं आता। खुद और अपने शिशु को बचाने की लड़ाई लड़ने लगती है। कमरे में पानी पूरी तरह से भर जाता है। तभी बंद रौशनदान पर लगे गत्ते को हटाते हुए एक गौरैया चीं चीं  करती आती है और नायिका का ध्यान अपनी ओर खींचते हुए रौशनदान से बहार निकलते हुए बचने का रास्ता दिखाती है। नायिका अपने शिशु  के संग रौशनदान को तोड़  घर बाहर निकल आती। अगर गौरैया रौशनदान के रास्ते कमरे में नहीं आती और वहां तक पानी पहुँच जाता तो तस्वीर कुछ और होती। गौरैया अचानक से नायिका और बच्चे को बचाने नहीं आई थी बल्कि, नायिका दरवाजे के पास जब सूप से अनाज फटकती है तो गिरे अनाज को गौरैया चुगने आती है। नायिका उसकी ओर मुखातिव होती  और उसे अनाज खाने को देती । संकट में महिला और शिशु को जहाँ इंसानी मदद नहीं मिली वहां एक चिड़िया वह भी गौरैया आती है। फिल्म की यह कहानी सन्देश देती है। घर आंगन से गायब गौरैया, जो हमसे दूर होती जा रही है वह इंसान की दोस्त है। संकट में एक दूसरे की मदद करते हैं। ऐसे में हम से रूठी गौरैया को बुलाने के लिए आहार (दाना-पानी) और आवासीय व्यवस्था  देनी होगी। फिल्म के कहानीकार चाहते तो गौरैया की जगह किसी दूसरे पशु -पक्षी को रख सकते थे, लेकिन गौरैया को स्थान देकर इसके संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देने का काम किया है कि रौशनदान को बंद नहीं खोलें।

पक्षी अहसान ही नहीं जीवन की राह को आसान बनाते हैं और रास्ता दिखाते भी हैं। चर्चित अभिनेता सूर्या की फ़िल्म ‘सूरराई पोटरू’ यानि ‘उड़ान’ में भी गौरैया रास्ता दिखाती मिलती है। बेहतरीन छायांकन के साथ गौरैया का फिल्म में अहम किरदार है। साउथ फिल्मों के सुपरस्टार अभिनेता सूर्या ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है जो गांववालों को सस्ते दामों में हवाई यात्रा कराने का सपना पूरा करने की कोशिश में जुटा है। वह एक एयरलाइंस खड़ी करना चाहता है, जिसके लिए वह लोन लेने जाता है। एयर डेक्कन के संस्थापक कैप्टन जी.आर. गोपीनाथ के जीवन पर आधारित इस फिल्म का नायक एक रुपए में हवाई यात्रा कराने के प्रोजेक्ट के को लेकर  संघर्ष करता है। बात फिल्म में गौरैया की तो, एक दिन जब घर में नायक एयरलाइन को लेकर चिंतन में था और नायिका उनकी पत्नी सुंदरी उर्फ बोम्मी छत पर गौरैयों को दाना दे रही थी, तभी एक गौरैया घर में आ जाती है और छोटी-छोटी उड़ान भरती है तो नायक के जेहन में छोटे विमान उड़ाने का  आइडिया आता है और एक टर्बोप्रॉप विमान निर्माता के साथ सौदा करता है। हाल की इन साऊथ की फिल्मों में गौरैया एक आइकन की तरह है एक ओर जीवन बचाती है तो दूसरी ओर जीवन की उड़ान भरवाने में मददगार होती है।

रजनीकांत और अक्षय कुमार अभिनीत चर्चित फ़िल्म 2.0 में गौरैया की अहम भूमिका है । मोबाइल टावर  से पक्षियों को होने वाले नुकसान पर फ़िल्म केंद्रित है। फ़िल्म में पक्षी प्रेमी नायक पक्षीराज की कहानी  गौरैया से जुड़ी है। पक्षीराज का जब जन्म अस्पताल में होता है तब शरीर नीला पड़ गया था सांसे रुकी थी डॉक्टर ने जवाब दे दिया था, तभी  एक मादा गौरैया खिड़की से आकर बच्चे की  छाती पर बैठ जाती है और बच्चे के दिल के पास चोंच मारने लगती है, कई बार चोंच मारने के बाद …बच्चा चिहुंक कर सांसे लेने लगता है। बच्चा रोने लगता है…उसकी सांसे चलने लगती है। गौरैया बच्चे के इर्द गिर्द मंडराती है …। बच्चे की माँ और दादी हतप्रभ हो जाते है। ईश्वरी चमत्कार या इतेफाक मानते हैं।…फिर गौरैया चीं चीं की आवाज़ निकालती खिड़की से बाहर उड़ जाती है। कुछ साल बाद एक दिन जब बच्चा कमरे में सो रहा था तब एक नर गौरैया  को खिड़की के पास आता  है  उसके चोंच में तिनका था जो पंखे के कप में घोंसला में डालना चाहता था लेकिन पंखे के चलने से वहां तक नहीं जा पाता। बच्चा पक्षीराज पंखे को बंद कर देता है। गौरैया वहां जाकर  घोंसले में तिनका रख बाहर उड़ जाता है। बच्चा पक्षिराज स्टूल पर चढ़कर घोंसले को देखता है जहां अंडे हैं तब,बच्चा पक्षीराज ने पंखे का विधुत कनेक्शन काट देता है और ठान लेता है कि अपनी जिन्दगी चिड़ियों के लिये समर्पित कर देगा। और ऐसा ही करता है । पक्षियों की दुनिया बनाता है सेवा एवं शोध करता और पक्षी विशेषज्ञ बन जाता है सब लोग उसे पक्षीराज पुकारते हैं, लेकिन मोबाइल टावर के लगने से मरते पक्षियों के  दर्द  को सहन नहीं कर पाता और टावर पर चढ़ कर आत्महत्या कर लेता है। मृत पक्षियों की आत्मा पक्षीराज की आत्मा से  मिल जाते है और पक्षीराज  ताकतवर बन कर मोबाइल तंत्र के ख़िलाफ़ लड़ाई शुरू कर देता है। पक्षीराज अपनी कहानी सुनाने के लिए इंसानी रूप में जब आता है तो उसे इंसानी रूप देने के लिये गौरैयों की झुंड ही उसे आकर देती है। फ़िल्म में गौरैया जीवनदाता की भूमिका में तो है कि इंसान की ही तरह जीव जंतु भी प्राकृतिक चिकित्सा की जानकारी रखते हैं। गौरैया ने भी दिल के पास चोंच से पंच कर बच्चे के दिल को गतिशील बनायी। साथ ही झुंड बन ताकत का प्रतीक भी है फ़िल्म में यह  रेखांकित है।

21 अक्तूबर 2022 में आई साउथ के चर्चित हीरो नंदामुरी कल्याण राम अभिनीत एनटीआर आर्ट्स द्वारा निर्मित और मल्लीदी वशिष्ठ द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘बिम्बिसार’ में गौरैया झुंड में दिखाई गयी। फिल्म का तमिल, कन्नड़, मलयालम और तेलुगू में बनी यह फिल्म कल्पनाओं/ऐतिहासिक पात्रों से घिरी है जहां  विलुप्त होती गौरैया को भी जगह मिली है। दृश्य में जब राजा बिम्बिसार अपने मंत्रीगण से महल के खुले परिसर में मंत्रणा कर रहा है तभी गौरैया झुंड में आती है दाना चुगती है। बातचीत के क्रम में आक्रोश में आकर राजा एक गौरैया को पकड़ लेता है और अपने ग़ुस्से का इज़हार करता है हालाँकि बाद में गौरैया को उड़ा देता है।

वर्ष 2020 में आयी हॉलीवुड  की एनिमेशन फिल्म  ‘पीटर रैबिट’ सहित और भी कई फिल्मों में गौरैया को  देखा जा सकता है। हॉलीवुड की फिल्म पीटर रैबिट यह एक एनिमेशन फिल्म है और जीव जंतुओं के साथ गौरैया को दिखाया गया है। फिल्म में मनमोहक गौरैया का झुण्ड गीत–नृत्य करते  दिखता  है।

यू टूब पर भी गौरैया की कई कार्टून फ़िल्म है। । काफ़ी चर्चित है, जो गौरैया की खूंटे में फंसी एक दाल की कथा है, जिसे पाने के लिए वह अथक संघर्ष करती है। गीत में ‘अपने परिवार के भोजन के लिए खूंटे में फंसे दाल के एक दाने के लिए बढ़ई से लेकर राजा, रानी, सांप, बांस, जंगल, आग, समुद्र और हाथी तक से फ़रियाद करने वाली मासूम चिड़िया की मासूम कहानी बच्चों सहित बड़ों को अपनी और खींचती है। नन्हीं गौरैया को दाल का वह दाना वापस मिलता है चींटियों के साथ और सहयोग से। गौरैया की दिल को छुने वाली व्यथा अथक संघर्ष की वह कहानी है जो हर नन्हे और कमजोर को बल देती है। गौरैया माँ का प्यार, गर्भवती गौरैया, गरीब गौरैया की कठिनाई, गरीब गौरैया बच्चे, चूड़ी बेचने वाली गौरैया, गौरैया की तीन संताने, गौरैया और बंदर की कहानी सहित कई कार्टून फ़िल्म यू टूब पर हैं जो गौरैया चरित्र पर केंद्रित हैं। पशु हो या पक्षी इंसान के साथ इनका गहरा संबंध है, खासकर घरेलू पशु- पक्षियों का। ऐसे में हमारा भी फर्ज बनता है कि उनका ख्याल हम रखे, खासकर विलुप्ति या पलायन की ओर बढ़ रही गौरैया का क्योंकि  गौरैया एक घरेलू पक्षी है। ऐसे में  फ़िल्म के ज़रिये ग़ौरैया संरक्षण का  संदेश  मायने रखता है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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