पटना: 23 जून 2026/ बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा राज्य के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और हरित प्रथाओं को विकसित करने तथा विद्यालयों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किये जा रहे उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गत वर्ष ‘हरित विद्यालय प्रतियोगिता-2025 आयोजित की गई थी, जिसमें स्वमूल्यांकन व सत्यापन के पश्चात चयनित विद्यालयों को सम्मानित किया गया था। विद्यालयों में पर्यावरण सरंक्षण के प्रति आ रही जागरूकता को गति देने के उद्देश्य से बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा इस वर्ष भी ‘हरित विद्यालय प्रतियोगिता-2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
इच्छुक विद्यालयों से आवेदन आमंत्रित किए गये हैं जिसे प्राप्त करने की अंतिम तिथि दिनांक 30 जुलाई, 2026 के अपराह्न 04ः00 बजे तक रखी गयी है।
इस प्रतियोगिता में आवदेन करने हेतु पर्षद् के वेबसाईट-https://bspcb.bihar.gov.in/ के ‘नोटिस’ में जाकर अथवा इस लिंकhttp://bspcb.bihar.gov.in/harit_school_2.pdf पर क्लिक करने पर विज्ञापन दिखेगा जिसमें दिये गये दो क्यू.आर कोड को स्कैन करने पर क्रमशः ‘आवेदन प्रपत्र’ तथा ‘आवेदन संबंधी मार्गदर्शिका’ उपलब्ध है।
आवेदन प्रपत्र को भरकर पर्षद् के ई.मेल- msbspcb-bih@gov.in पर प्रेषित किया जा सकता है।
प्राप्त आवेदनों कें स्वमूल्यांकन का सत्यापन बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा गठित समिति द्वारा दिनांक 10 जुलाई, 2026 से किया जायेगा। सर्वाेत्तम प्रदर्शन वाले विद्यालयों को पर्षद् द्वारा सम्मानित किया जायेगा।
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा ‘हरित विद्यालय प्रतियोगिता-2026’ का आयोजन
पटना: 23 जून 2026/ बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् द्वारा राज्य के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और हरित प्रथाओं को विकसित करने तथा विद्यालयों द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किये जा रहे उत्कृष्ट प्रयासों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गत वर्ष ‘हरित विद्यालय प्रतियोगिता-2025 आयोजित की…

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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
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