संजय कुमार / एक अद्वितीय स्मारक गुजरात के अहमदाबाद में है। जो एक गौरैया पक्षी को समर्पित है। यह स्मारक यानी पट्टिका खुद में अनूठी है। क्योंकि संभवतः दुनिया का एकमात्र स्मारक है जो एक पक्षी गौरैया की शहादत को समर्पित है। ग़ौरैया संरक्षण में लगे गौरैया प्रेमियों के लिये यह जानकारी रोचक है।
गौरैया की शहादत को समर्पित स्मारक प्रकृति और सभी जीव जंतुओं के प्रति गहरे प्रेम और मानवीय संवेदना को दर्शाता है। यों तो पालतू प्रेमी अपने पालतू पेट की याद में स्मारक बनाते मिल जाते हैं। फिल्मों में भी यह दिख जाता है लेकिन घरेलू पक्षी गौरैया की नहीं दिखती है।
2 मार्च 1974 को रोटी रामखान (नवनिर्माण आंदोलन) आन्दोलन के दौरान शाम 5.25 बजे पुलिस फायरिग में कई लोग गोली के शिकार हुए थे, इसमें एक नन्ही गौरैया की भी मौत हो गयी थी। इस बात का जिक्र स्मारक पर गौरैया के लिए लिखे गए संदेशों के साथ खुदा हुआ, जो सीमेंट की पट्टिका पर उकरा हुआ है।
गौरैया की शहादत को समर्पित स्मारक – पट्टिका की संरचना के ऊपरी हिस्से में अंग्रेजी और गुजराती दोनों में उत्कीर्ण संदेश हैं, संरचना के निचले हिस्से में एक गौरैया की आकृति है, जो पुष्पांजलि की तरह पत्तियों से घिरी हुई है।
स्मारक कैसा दिखता है?
ऊपरी हिस्सा: गुजराती और अंग्रेजी में संदेश खुदा है। लिखा है –”On 2nd March 1974 at 5:25 pm during the Navnirman Andolan police firing, a sparrow was also martyred.”तारीख, समय और घटना का जिक्र है।
निचला हिस्सा: बीच में गौरैया की आकृति उकेरी गई है। उसके चारों तरफ पत्तियों की नक्काशी है, जैसे पुष्पांजलि दी गई हो।साइज: कोई बड़ा स्मारक नहीं है। करीब 2×3 फीट की सीमेंट की पट्टिका है। पर भाव बहुत बड़ा है।
देखा जाये तो अहमदाबाद शायद दुनिया में एकमात्र ऐसा जगह है जहां एक गौरैया की शहादत को याद करने वाली पट्टिका है। जबकि, गौरैया गुजरात की राजकीय पक्षी नहीं है। गौरैया, बिहार और दिल्ली की राजकीय पक्षी जरूर है लेकिन इसकी विलुप्ति और संरक्षण को लेकर पूरा विश्व सजग है। इंसान के बीच रहने वाली गौरैया इंसान से दूर हो गयी है लेकिन गौरैया प्रेमी / संरक्षक इसकी वापसी को लेकर सक्रिय हैं।















