निशांत रंजन/ विकास की अंधी दौड़, नये-नये आविष्कारों की स्पर्धा, जनसंख्या की निरंतर वृद्धि, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण की आपाधापी से प्रकृति के संतुलन में बिगाड़ आदि परिस्थितियों ने पर्यावरण को खतरे में डाल दिया गया है। ऐसे ही अनेक सवालों को उठाती गौरैयाविद लेखक संजय कुमार की पुस्तक “जल जीवन हरियाली” आई है। पर्यावरण संरक्षण के सवालों को लेकर ‘जल जीवन हरियाली’ पुस्तक में कुल 42 अध्याय हैं। इसे दिल्ली के न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन ने प्रकाशित किया है। पुस्तक की क़ीमत रुपये 299 है।
पुस्तक में एक ओर प्रकृति के हरे भरे क्षेत्रों को समाप्त किए जाने और दूसरी ओर प्रकृति के अत्यधिक दोहन के चलते बिगड़ते पर्यावरण के बिंदुओं को बहुत बारीकी से रेखांकित किया गया है। मसलन, चमचमाती सड़कों, हीरा, खनिज आदि के लिए पेड़ों को काटना और प्रकृति का फेंफड़ा जंगल का उजड़ना को जहां समेटा गया है। वहीं प्रगति और आर्थिक विकास के आईने से जोड़ जिस प्लास्टिक को इन्सान ने दिल से लगाया, आज वही जी का जंजाल बन जीव-जंतु को निगल रहा है। सहित कई मुद्दे पुस्तक में शामिल हैं।
इस पुस्तक में ख़तरे में मिट्टी, ग्लोबल वार्मिग से लेकर जलवायु परिवर्तन से पर्यावरण की बिगड़ती तस्वीर के हर पहलू को लेखक ने रखा है। आलेख के माध्यम से लेखक ने पर्यावरण की जो तस्वीर दिखायी है वह भयावह है। लोगों से आलेखों में अपील भी है कि बिगड़ते पर्यावरण को बचाये ! क्योंकि पर्यावरण को बिगाड़ने में इंसान की भूमिका अहम रही है। सबसे बड़ा उदाहरण प्लास्टिक का है। प्रतिबंध के बावजूद जीवन से यह निकाल नहीं पा रहा है दूसरी ओर लगातार तापमान बढ़ रहा है। पर्यावरण के विभिन्न आयामों पर लिखे इस पुस्तक से लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश जरूर मिलेगा। लेखक की यह 16 वीं और पर्यावरण पर पाँचवीं पुस्तक है।
पुस्तक : जल जीवन हरियाली
लेखक : संजय कुमार
प्रकाशक : न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली
मूल्य : 299/-
संस्करण : 2024 प्रथम
पर्यावरण के खतरों से आगाह करती संजय कुमार की पुस्तक : जल जीवन हरियाली
निशांत रंजन/ विकास की अंधी दौड़, नये-नये आविष्कारों की स्पर्धा, जनसंख्या की निरंतर वृद्धि, औद्योगीकरण एवं शहरीकरण की आपाधापी से प्रकृति के संतुलन में बिगाड़ आदि परिस्थितियों ने पर्यावरण को खतरे में डाल दिया गया है। ऐसे ही अनेक सवालों को उठाती गौरैयाविद लेखक संजय कुमार की पुस्तक “जल जीवन हरियाली” आई है। पर्यावरण संरक्षण…

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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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