संजय कुमार / गौरैया के पैर में तीन नाख़ून आगे और एक पीछे होता है जो बहुत ही मजबूत होते हैं, जो उसे पतले तार पर पकड़ बनाने में मदद करते हैं। गौरैया पतले-मोटे तार पर बहुत ही आसानी और आराम से बैठ जाती है, जैसे कि वह एक आरामदायक कुर्सी पर बैठी हो। गौरैया का शरीर बहुत ही हल्का होता है, जिससे वह पतले तार पर आसानी से संतुलन बना सकती है।
गौरैया के पैर को वैज्ञानिक भाषा में ‘एनिसोडैक्टाइल (Anisodactyl) कहते हैं। तीन नाखून आगे का शिकार पकड़ने या टहनी को जकड़ने के लिए होता है। ये तीनों मिलकर आगे का पंजा बनाते हैं।एक नाखून पीछे रहता है, इसे हैलक्स (Hallux ) कहते हैं। ये सबसे ताकतवर होता है। यही पीछे वाला नाखून असली ‘लॉक’ है। पक्षियों में ‘एनिसोडैक्टाइल’ पैरों की उंगलियों का सबसे आम क्रम है, जिसमें तीन उंगलियां आगे की ओर और एक उंगली (हैलक्स) पीछे की ओर होती है। यह बनावट पेड़ों की टहनियों पर बैठने के लिए बहुत उपयुक्त होती है।

गौरैया के पैर में ‘टेंडन लॉकिंग मैकेनिज़्म’ (‘Tendon Locking Mechanism’ होता है) एक विशेष शारीरिक संरचना है जो पक्षियों में पाई जाती है। यह उन्हें बिना किसी मांसपेशी के प्रयास के पेड़ों की शाखाओं पर मजबूती से लटके रहने या सोने में मदद करती है। गौरैया जब तार पर बैठती है तो घुटने मुड़ते हैं। घुटना मुड़ते ही पैर की नसें खिंच जाती हैं और नाखून अपने-आप तार को जकड़ लेते हैं। सोते समय भी गौरैया तार से गिरती नहीं क्योंकि ये लॉक तब तक नहीं खुलता जब तक वो खुद पैर सीधा न करे। एकदम ऑटोमेटिक लॉक। तेज हवा हो तब भी नहीं खुलती ।
पतले तार पर ‘आरामकुर्सी’ जैसा आराम मिलता है। पीछे वाला नाखून तार के नीचे से लिपट जाता है। आगे के तीन नाखून ऊपर से दबाते हैं। तार चारों तरफ से जकड़ जाता है। गौरैया सिर्फ 24-40 ग्राम की होती है। इतने हल्के वजन को संभालने के लिए उसे जोर नहीं लगाना पड़ता। गौरैया का शरीर बैठते ही गुत्व्कर्ष्ण ‘गुरुत्वाकर्षण केंद्र ठीक तार के ऊपर आ जाता है। पूंछ को ऊपर-नीचे करके वो पल-पल बैलेंस करती है, जैसे सर्कस का नट। उड़ने और बैठने के दौरान पंखों का फैलाव कर संतुलन बना लेती है।
इंसान लगातार कुर्सी पर दो घंटे बैठे तो थक जायेगा । लेकिन गौरैया पतले तार पर घंटों बिना थके बैठी रहती है, चहचहाती है, सो भी जाती है। क्योंकि कुदरत ने उसके पैर में ऑटोमैटिक लॉक और शरीर में रुई-सी हल्कापन दिया है।
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