(विश्व पर्यावरण दिवस 2026 : 5जून)
निशांत रंजन / इतिहास की किताबों में दर्ज कई साम्राज्य आए और चले गए. पीढ़ियां बदलीं, शहर का स्वरूप बदला, बिहार के मुंगेर में इन सारे बदलाव का साक्षी आज भी मौजूद है. दरअसल, मुंगेर में देश का सबसे पुराने पेड़ की पहचान की गयी है. वैज्ञानिक पद्धति (कार्बन डेटिंग) के अनुसार, यह वृक्ष करीब 700 साल पुराना है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस पेड़ ने भारत में मुगल साम्राज्य का उत्थान और पतन देखा, ब्रिटिश हुकूमत का जुल्म सहा और 1947 में भारत की आजादी के जश्न का भी गवाह बना।
बिहार के मुंगेर में सालों पुराने वटवृक्ष की पहचान की गयी है. दरअसल, दुनिया के इस सबसे पुराने बरगद के पेड़ पर यूपी की राजधानी लखनऊ के बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान रिसर्च कर रही थी. इसी क्रम में साल 2022 में इस पेड़ के बारे में जानकारी मिली. ये पेड़ शहर के बीच आईटीसी परिसर में मौजूद है. इसके बाद, पेड़ की बकायदा कार्बन डेंटिंग की गई. जब नतीजे आए तो पता चला कि मुंगेर के बरगद का विशालकाय पेड़ देश का सबसे पुराना बरगद है. इसकी उम्र 700 साल से भी अधिक है.
देश के तीन सबसे पुराने बरगद के वृक्ष की पहचान की गयी है. इसमें दूसरे स्थान पर बुलंदशहर के सिद्धबाड़ी का वट वृक्ष और तीसरे स्थान पर कोलकाता के जगदीश चंद्र बॉटनिकल गार्डन का वट वृक्ष शामिल है. इस बरगद के पेड़ को जल्द ही हेरिटेज ट्री घोषित किया जाएगा. वन विभाग इसकी विज्ञानी देखरेख और संरक्षण की तैयारी में जुट गया है.
आईटीसी परिसर में मौजूद ये वृक्ष करीब 100 मीटर के दायरे में फैला हुआ है. इसकी ऊंचाई लगभग 60 फीट है. इसकी सैकड़ों हवाई जड़े जमीन तक पहुंचकर नए तनों का रूप ले चुकी हैं, जिससे पूरा क्षेत्र किसी छोटे जंगल जैसा दिखाई देता है. इस विशाल संरचना की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तेज आंधियों, तूफानों और वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप के बावजूद यह वृक्ष अडिग खड़ा रहा.















