देश भर में गूंजेगी ‘प्रोजेक्ट बिग कैट’ की दहाड़

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बड़ी बिल्लियों (Big Cats) के संरक्षण में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करने के लिए एक मेगा अभियान की शुरुआत की है। मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में पांच प्रमुख प्रजातियों—बाघ, एशियाई शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता—पर आधारित विशेष विषयगत कार्यक्रमों का…

नई दिल्ली। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बड़ी बिल्लियों (Big Cats) के संरक्षण में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को रेखांकित करने के लिए एक मेगा अभियान की शुरुआत की है। मंत्रालय देश के विभिन्न हिस्सों में पांच प्रमुख प्रजातियों—बाघ, एशियाई शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ और चीता—पर आधारित विशेष विषयगत कार्यक्रमों का आयोजन करने जा रहा है। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य ‘अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस’ (IBCA) के लक्ष्यों को जन-जन तक पहुँचाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना है।

पांच शहरों में सजेंगे संरक्षण के मंच
मंत्रालय ने इन कार्यक्रमों के लिए उन क्षेत्रों को चुना है जो संबंधित प्रजातियों के प्राकृतिक आवास या संरक्षण के केंद्र रहे हैं:

गिर (गुजरात): एशियाई शेर संरक्षण कार्यक्रम (विषय: भारत की अद्वितीय सफलता)।

चंद्रपुर (महाराष्ट्र): बाघ संरक्षण कार्यक्रम (विषय: वैश्विक बाघ आबादी का 70% भारत में)।

भोपाल (मध्य प्रदेश): चीता संरक्षण कार्यक्रम (विषय: घास के मैदानों का पुनरुद्धार)।

गंगटोक (सिक्किम): हिम तेंदुआ संरक्षण कार्यक्रम (विषय: हिमालय का प्रहरी)।

भुवनेश्वर (ओडिशा): तेंदुआ संरक्षण एवं अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस।

संरक्षण की ‘सफलता गाथा’ पर रहेगा जोर इन कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार अपनी प्रमुख उपलब्धियों को जनता के सामने रखेगी:

एजेंडा 2026: प्रोजेक्ट टाइगर और प्रोजेक्ट लायन के तहत बढ़ती आबादी और आधुनिक निगरानी प्रणालियों (AI और ड्रोन) का प्रदर्शन।

सह-अस्तित्व: ओडिशा में तेंदुओं और इंसानों के बीच संघर्ष कम करने के सफल प्रयासों और सामुदायिक भागीदारी (जैसे गिर के मालधारी समुदाय) पर चर्चा होगी।

ऐतिहासिक पहल: मध्य प्रदेश में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों के माध्यम से दुनिया की पहली अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण परियोजना की बारीकियों को साझा किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर स्थापित IBCA का लक्ष्य दुनिया की सात प्रमुख बड़ी बिल्लियों के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग सुनिश्चित करना है। यह गठबंधन ज्ञान साझा करने, शिकार-विरोधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पर्यटन के माध्यम से स्थानीय समुदायों की आजीविका सुधारने पर केंद्रित है।

भारत सरकार और राज्यों द्वारा अपनाई गई प्रमुख संरक्षण पहलें

एशियाई शेर संरक्षण– गिर, गुजरात

विषय: भारत की अद्वितीय संरक्षण सफलता

एशियाई शेर केवल भारत में ही जीवित है और यह दुनिया के सबसे सफल प्रजाति संरक्षण कार्यक्रमों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है।

कार्यान्वित की गई प्रमुख पहलें:

  • दीर्घकालिक संरक्षण और पर्यावास विस्तार के लिए प्रोजेक्ट लायन का कार्यान्वयन।
  • वैज्ञानिक जनसंख्या निगरानी और रोग निगरानी प्रणालियां।
  • ग्रेटर गिर भूभाग में पर्यावास सुधार और शिकार की उपलब्धता में वृद्धि।
  • गिर संरक्षित क्षेत्र से परे आसपास के भूभागों में शेरों के वितरण का विस्तार।
  • संघर्ष को कम करने के लिए बचाव और त्वरित प्रतिक्रिया दल।
  • प्रजाति संरक्षण में मालधारी जैसे समुदायों की भूमिका
  • गुजरात सरकार द्वारा सामुदायिक सहभागिता और पशुधन क्षतिपूर्ति तंत्र के लिए की गई पहल।

बाघ संरक्षण- चंद्रपुर, महाराष्ट्र

विषय: भारत के वन संरक्षण का प्रमुख केंद्र

भारत विश्व के जंगली बाघों की आबादी में से 70 प्रतिशत से अधिक का आवास है और प्रोजेक्ट टाइगर और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के अंतर्गत निरंतर प्रयासों के माध्यम से बाघ संरक्षण में एक वैश्विक प्रमुख के रूप में उभरा है।

कार्यान्वित की गई प्रमुख पहलें:

  • देशभर में बाघ अभ्यारण्यों को मजबूत करना और उनका विस्तार करना।
  • भू-भाग स्तर पर संरक्षण और वन्यजीव गलियारों की सुरक्षा।
  • कैमरा ट्रैपिंग, एम-स्ट्राइप्स और एआई-सक्षम निगरानी प्रणालियों सहित आधुनिक तकनीक का उपयोग।
  • शिकार-विरोधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और विशेष बाघ संरक्षण बल की तैनाती।
  • मुख्य आवास क्षेत्रों से स्वैच्छिक ग्राम स्थानांतरण।
  • बाघ अभ्यारण्यों के आसपास सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरण विकास संबंधी पहल।
  • वन्यजीव पर्यटन और समुदायों की आजीविका को बढ़ावा देना।
  • महाराष्ट्र विदर्भ क्षेत्र, जिसमें चंद्रपुर भी शामिल है, में संपर्क सुधारने और मानव-बाघ संघर्ष को कम करने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।

चंद्रपुर में होने वाले इस कार्यक्रम में भारत में बाघों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार और उनके आवासों और गलियारों को सुरक्षित करने के लिए जारी प्रयासों की जानकारी दी जाएगी।

तेंदुआ संरक्षण एवं जैव विविधता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस – भुवनेश्वर, ओडिशा

विषय: मानव-प्रधान भूदृश्यों में सहअस्तित्व

भारत में तेंदुए सबसे व्यापक रूप से व्याप्त बड़ी बिल्लियों में से हैं और अक्सर मानव बस्तियों के निकट के क्षेत्रों में निवास करते हैं।

कार्यान्वित की गई प्रमुख पहलें:

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष शमन कार्यक्रम और त्वरित प्रतिक्रिया दल।
  • बचाव और पुनर्वास संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।
  • सहअस्तित्व को बढ़ावा देने वाले जन जागरूकता अभियान।
  • वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्य।
  • संघर्ष की प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों पर नज़र रखने और उनकी निगरानी करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग।
  • ओडिशा की जैव विविधता संरक्षण पहलें पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और सामुदायिक भागीदारी से जुड़ी हुई हैं।

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाला भुवनेश्वर का यह कार्यक्रम मानव-प्रधान परिदृश्यों में सहअस्तित्व और जैव विविधता संरक्षण पर बल देगा।

हिम तेंदुए का संरक्षण– गंगटोक, सिक्किम

विषय: हिमालय का प्रहरी

हिम तेंदुए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के पारिस्थितिक स्वास्थ्य के सूचक हैं और जलवायु परिवर्तन और पर्यावास के क्षरण से खतरों का सामना करते हैं।

कार्यान्वित की गई प्रमुख पहलें:

  • भारत में हिम तेंदुए की जनसंख्या आकलन (एसपीएआई) कार्यक्रम का कार्यान्वयन।
  • स्थानीय हिमालयी समुदायों को शामिल करते हुए समुदाय आधारित संरक्षण।
  • सतत आजीविका और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देना।
  • उच्च ऊंचाई वाले आवासों और शिकार प्रजातियों का संरक्षण।
  • हिमालयी भूभागों में जलवायु-प्रतिरोधी संरक्षण योजना।
  • सीमा पार संरक्षण पहलों के लिए हिमालयी राज्यों के साथ सहयोग।

गंगटोक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण करना और हिम तेंदुओं की रक्षा में स्थानीय समुदायों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

चीता संरक्षण- भोपाल, मध्य प्रदेश

विषय: भारत के घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन

भारत ने प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत बड़े मांसाहारी जानवरों के लिए दुनिया की पहली अंतरमहाद्वीपीय स्थानांतरण परियोजना शुरू की है।

कार्यान्वित की गई प्रमुख पहलें:

  • नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को मध्य प्रदेश के उपयुक्त आवासों में पुनः स्थापित करना।
  • शिकार आधार और घास के मैदान पारिस्थितिकी तंत्र का विकास।
  • सैटेलाइट कॉलर और विशेषज्ञ प्रबंधन प्रोटोकॉल के माध्यम से वैज्ञानिक निगरानी।
  • फील्ड स्टाफ और पशु चिकित्सा टीमों की क्षमता निर्माण।
  • दीर्घकालिक पर्यावास प्रबंधन और विस्तार योजना।
  • रिलीज परिदृश्यों के आसपास सामुदायिक संपर्क को मजबूत करना।

भोपाल कार्यक्रम में चीतों के संरक्षण और घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने के लिए भारत द्वारा किए गए अग्रणी प्रयासों पर प्रकाश डाला जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए)

भारत द्वारा शुरू किए गए अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस का उद्देश्य विश्व स्तर पर सात प्रमुख बिग कैट प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करना है। विषयगत कार्यक्रम निम्नलिखित के लिए मंच के रूप में कार्य करेंगे:

  • बड़ी बिल्लियों के संरक्षण पर केंद्रित अपनी तरह के पहले वैश्विक शिखर सम्मेलन की जानकारी उपलब्ध कराना।
  • वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना।
  • संरक्षण संबंधी ज्ञान साझा करें।
  • नीतिगत पहलों पर प्रकाश डालें।
  • जन जागरूकता बढ़ाना, और
  • वन्यजीव संरक्षण में भारत के नेतृत्व को सुदृढ़ करना।

इन कार्यक्रमों का आयोजन पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा राज्य वन विभागों, एनटीसीए, भारतीय वन्यजीव संस्थान, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, भारतीय वन प्रबंधन संस्थान और अन्य हितधारकों के समन्वय से किया जा रहा है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

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