गौरैया की डोर काटती पतंग-चाइनीज मांझा

संजय कुमार / गौरैया / पतंग की डोर मजबूत हो उसके लिए चाइनीज मांझा यानि लेड कोडेड नायलॉन/सिंथेटिक धागा जहाँ अपनी अत्यधिक मजबूती और धार के कारण दूसरे पतंग की डोर काट रहा है वही, गौरैया, कबूतर, मोर सहित अनगिनत पक्षियों के जीवन की डोर को काट, उनके लिए ‘काल’ बना हुआ है। यह धागा…

संजय कुमार / गौरैया / पतंग की डोर मजबूत हो उसके लिए चाइनीज मांझा यानि लेड कोडेड नायलॉन/सिंथेटिक धागा जहाँ अपनी अत्यधिक मजबूती और धार के कारण दूसरे पतंग की डोर काट रहा है वही, गौरैया, कबूतर, मोर सहित अनगिनत पक्षियों के जीवन की डोर को काट, उनके लिए ‘काल’ बना हुआ है। यह धागा पारदर्शी और बेहद पतला होने के कारण हवा में दिखाई नहीं देता, जिससे पक्षी इसमें उलझकर पंख कटने या गला कटने से तड़पकर मर रहे हैं। वहीँ इसके चपेटे में इन्सान भी आ रहे है। बाइक, साईकिल सवार की गर्दन चाइनीज मांझा धागा की चपेट में आ रहे हैं  ।

प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझा कहे जाने वाले लेड-कोटेड और नायलॉन मांझों की खरीद-बिक्री एवं इस्तेमाल जारी है। चाइनीज मांझा यानि नायलॉन/सिंथेटिक धागा पारदर्शी होने के कारण पक्षियों को दिखाई नहीं देता, जिससे वे फंसकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं या दम तोड़ रहे हैं। दिल्ली, यूपी और अन्य राज्यों में इस पर प्रतिबंध के बावजूद, यह “सुपर शार्प” के नाम से बिक रहा है, जो इंसानों और बेजुबानों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। यह धागा पक्षियों के पंखों और गर्दन को काट देता है या इसमें वे फंसकर फड़फड़ाते हुए जान गंवा दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट को देखें तो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर  में  मोर  की जान लेने जैसी घटना सामने आई है। कई मामले तो सामने आते नहीं। चुपके से सुपर शार्प धागा गौरैया सहित दूसरी चिड़ियों की जीवन लीला को समाप्त कर रहे हैं। नन्ही गौरैया जब इस धागे की चपेट में आती है तो समय भी नहीं मिल पता। अगर पंख धागा  में उलझ गया तो जितना उससे आजाद होने के लिए जोर लगाती है उतना ही जल्द मौत के करीब पहुँच जाती है।  धागा नायलॉन से बने होने के कारण टूटता नहीं है और लंबे समय तक पेड़ों या तारों पर लटककर पक्षियों के लिए खतरा बना रहता है।  मकर संक्रांति या अन्य मौकों पर सूती धागे से पतंग उड़ाने की अपील होती है लेकिन कोई असर नहीं होता। चाइनीज मांझा पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। इसे खरीदने और बेचने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत 5 साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 188 के तहत छह महीने तक की सजा या जुर्माना हो सकता है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 11 के तहत 50,000 रुपये तक का जुर्माना और पांच  साल की सजा का प्रावधान है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल  ने 2017 में पूरे देश में नायलॉन या किसी भी सिंथेटिक सामग्री से बने पतंग उड़ाने वाले धागों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इसका कारण यह है कि ये धागे नॉन-बायोडिग्रेडेबल होते हैं जो प्राकृतिक रूप से नष्ट नहीं होते।

जरुरी है, पक्षियों की सुरक्षा के लिए चाइनीज मांझा वाले धागा को ना कहने की । क्योंकि, यह पक्षियों के साथ-साथ इन्सान को भी शिकार बना रहा है ।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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