प्रफुल्ल भाई पटेल ने जन्म दिन पर नि:शुल्क घोंसला वितरित कर बनाई पहचान

हिम्मतनगर / यह कहानी है गुजरात राज्य के अरवली जिले के साढंबा के पास में आए हुए एक छोटे से गांव दोलपुरा में जन्मे प्रफुल्ल भाई पटेल की उनको बचपन से ही पंछियों के प्रति लगाव था। जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे-वैसे पंछियों के प्रति उनका प्यार बढ़ता गया। पंछियों के लिए कुछ करना है…

हिम्मतनगर / यह कहानी है गुजरात राज्य के अरवली जिले के साढंबा के पास में आए हुए एक छोटे से गांव दोलपुरा में जन्मे प्रफुल्ल भाई पटेल की उनको बचपन से ही पंछियों के प्रति लगाव था। जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे-वैसे पंछियों के प्रति उनका प्यार बढ़ता गया। पंछियों के लिए कुछ करना है तो उन्होंने सोचा की छोटे परिंदों मैं गौरैया, पहले घर के आंगन में चहचहाती नजर पड़ती थी। पर अभी के घर की बनावट ऐसी है कि गौरैया का घोंसला बनाना मुश्किल है, तो उन्होंने शुरुआत मार्केट में घोसला ढूंढा। कहीं मिल जाए तो घर पर लगाए । पर, घोंसला नहीं मिलने की वजह से वह थोड़े से निराश हो गए। बाद में उन्होंने सोचा कि मेरे जैसे कितने लोग होंगे जिनको यह समस्या होती होगी। फिर उन्होंने शुरू किया घोंसला बनाने का कार्य, जिसे जो लोग घोंसला ढूंढ रहे हैं उनको घोंसला मिल जाए। घोंसला बनाकर बेचना शुरू किया। हिम्मतनगर में दुकान शुरू की। दुकान का नाम रखा गया नाइस इंटरप्राइज। शुरुआत के दिनों में घोंसला कोई खरीदता नहीं था, पर उन्होंने प्रयास शुरू रखा जैसे-जैसे समय गया वो पीछे नहीं हटे, वो रुके नहीं। जब भी उनके परिवार के सदस्य में किसी का जन्मदिन आता है तो वह चिड़िया के घोंसले उस दिन सबको फ्री में बाटते थे। मकर संक्रांति के त्योहार पर गली मोहल्ले में पड़े हुई धागों के बदले उन्होंने घोंसला देना शुरू किया लोग उनसे जुड़ते गए। औ,र उनको ऐसा कार्य करते हुए देखा तो दूसरे लोग भी प्रोत्साहित हुए। लोगों ने भी सोचा कि हमें भी ऐसा अच्छा कार्य करना चाहिए ,जिस किसी के घर पर किसी का जन्मदिन होता है तो प्रफुल्ल भाई पटेल के पास से एडवांस में घोंसला खरीदते हैं और प्रफुल्ल भाई उनको वह घोंसला या बर्ड फीडर उचित रेट में देते हैं अभी बहुत सारे लोग परिवार के किसी भी सदस्य के बर्थडे पर या अच्छे कार्य के दिन घोंसला लगाते हैं और दूसरों में बाटते हैं। प्रफुल्ल भाई पटेल के द्वारा शुरू किया गया यह कार्य आज बहुत सारे लोगों को प्रेरणा देता है अभी बहुत सारे लोग उनके पास से घोंसला लेकर सब में बाटते हैं। इससे एक नई दिशा लोगों को मिली है और बहुत सारी संस्थाओं के द्वारा उनको सम्मान पत्र भी मिला। प्रफुल्ल भाई पटेल के जीवन से हमें यही प्रेरणा मिलती है।
हमें जीवन में कभी भी निराश होना चाहिए नहीं हमें हमारा कार्य करते रहना चाहिए। अगर हमारा कार्य सही दिशा में है तो हमें सफलता अवश्य मिलेगी।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन