सोनपुर मंडल ने चलाया जल एवं ऊर्जा संरक्षण जागरूकता अभियान

सोनपुर,01 जून 2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने हेतु सोनपुर रेल मंडल द्वारा विभिन्न जागरूकता एवं संरक्षणात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस क्रम में उत्पादन इकाइयों तथा अन्य रेलवे प्रतिष्ठानों में जहां भी संभव हो, जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया…

सोनपुर,01 जून 2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने हेतु सोनपुर रेल मंडल द्वारा विभिन्न जागरूकता एवं संरक्षणात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया।

इस क्रम में उत्पादन इकाइयों तथा अन्य रेलवे प्रतिष्ठानों में जहां भी संभव हो, जल पुनर्चक्रण (Water Recycling) सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर, संतुलित एवं सतत उपयोग किया जा सके। इसके साथ ही जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाए गए, जिनमें जल के कुशल उपयोग तथा ऊर्जा संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया।

ऊर्जा संरक्षण के अंतर्गत एलईडी (LED) लाइटों के अधिकाधिक उपयोग, एयर कंडीशनर के विवेकपूर्ण एवं आवश्यकता-आधारित संचालन तथा अनावश्यक रूप से चालू विद्युत उपकरणों को बंद रखने जैसे व्यवहारिक उपायों को अपनाने के लिए कर्मचारियों एवं आमजन को प्रेरित किया गया।

इन पहलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने, प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने तथा हरित एवं ऊर्जा-संरक्षित भविष्य के निर्माण का संदेश दिया गया। सोनपुर मंडल ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे पर्यावरण संरक्षण, जल बचत एवं ऊर्जा दक्षता से जुड़े प्रयासों में सक्रिय भागीदारी निभाकर एक स्वच्छ, हरित एवं सतत भविष्य के निर्माण में अपना योगदान दें।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन