आई  लव  स्पैरो

 “आई  लव  स्पैरो” कोई राजनीतिक  नारा नहीं है बल्कि इंसान के घर-आँगन में चह्कने – फुदकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया को संरक्षित करने का सन्देश  है। इसकी शुरुआत 2010 में तब हुआ था, जब नेचर फॉर एवर सोसाइटी ऑफ इंडिया और इको-सिस एक्शन फाउंडेशन ऑफ फ्रांस ने 20 मार्च 2010 को विश्व गौरैया दिवस की…

 “आई  लव  स्पैरो” कोई राजनीतिक  नारा नहीं है बल्कि इंसान के घर-आँगन में चह्कने – फुदकने वाली नन्ही चिड़ियाँ गौरैया को संरक्षित करने का सन्देश  है। इसकी शुरुआत 2010 में तब हुआ था, जब नेचर फॉर एवर सोसाइटी ऑफ इंडिया और इको-सिस एक्शन फाउंडेशन ऑफ फ्रांस ने 20 मार्च 2010 को विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य बिलकुल साफ़ था, गौरैया की घटती आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उसके संरक्षण के लिए काम करना। लोगों को प्रेरित करना, क्योंकि यह इंसान के बेहद करीब रहती है। किसान मित्र तो है ही, साथ ही बच्चों का बचपन की साथी है।

‘आई लव स्पैरो’ नारा यो कहें स्लोगन मुख्य रूप से विश्व गौरैया दिवस की थीम के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। पहली बार यह 2010 से विश्व गौरैया दिवस के तहत आया, फिर ‘आई लव स्पैरो’ को 2019, 2021, 2023 में, बल्कि कई सालों से लगातार विश्व गौरैया दिवस का मुख्य थीम के रूप में अपनाया जाता रहा है।

नारा देने के पीछे उद्देश्य साफ़ था, कीटनाशकों का ज्यादा इस्तेमाल, कंक्रीट के जंगलों की बढ़ोतरी, पारंपरिक घोंसले बनाने की जगहों की कमी, आहार की कमी सहित अन्य कमी से गौरैया विलुप्ति की ओर अग्रसर हो रही है। ऐसे में उसका संरक्षण अहम हो जाता है। गाँव-शहरों से घरेलू गौरैया की तेजी से घटती संख्या को देखते हुए नेचर फॉरएवर सोसाइटी ऑफ इंडिया के मोहम्मद दिलावर ने पहल की और 2010 में 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस शुरू हुआ। दिल्ली सरकार ने 2012 और बिहार सरकार ने 2013 में गौरैया को राजकीय पक्षी  घोषित कर संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया था। 

‘आई लव स्पैरो’ यानि संरक्षण मुहीम से जुड़े लोग कहते हैं, ‘मुझे गौरैया से प्यार है’ आप भी कृत्रिम घोंसले घरों में लगायें, दाना-पानी रखें, और थोडा सा प्यार दें ताकि रूठ कर घर-आँगन से गयी गौरैया पक्षी की घरों में वापसी हो सकें। इस नारे का उद्देश्य लोगों में गौरैया के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना को बढ़ावा देना है। गौरैया एक महत्वपूर्ण पक्षी है जो हमारे पर्यावरण में कीटों की आबादी को नियंत्रित करने में मदद करती है। लेकिन, उसके आवासों के नुकसान और खेतों में कीटनाशकों के उपयोग के कारण उनकी संख्या तेजी से घट रही है। इसलिए, ‘आई लव स्पैरो’ का नारा लोगों को गौरैया के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है और उन्हें उनके प्रति प्रेम और सम्मान दिखाने के लिए प्रोत्साहित करता है। गौरैया भले ही आईयूसीएन की लाल सूचि में शामिल है लेकिन यह अभी जिन्दा है। ‘आई लव स्पैरो’ नारा/स्लोगन ने देश भर में सैकड़ों को गौरैया संरक्षण अभियान से जोड़ा है। इसमें बच्चें, युवा, बुजुर्ग, व्यक्तिगत, सरकारी और गैरसरकारी संगठन सक्रिय हैं। आज ‘आई लव स्पैरो’ अभियान बन चुका का है। और, मुहिम आज वैश्विक रूप ले चुकी है। लोग अब अपने घरों में कृत्रिम घोंसले (बर्ड बॉक्स), दाना और पानी के बर्तन रख कर इस नन्ही चिड़ियाँ का स्वागत कर रहे हैं। लोगों के घरों गौरैया आ रही है और लोग गौरैया को ‘आई लव स्पैरो’ कर धन्यवाद भी दे रहे हैं.

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन