वन्यजीव और जैव विविधता का अद्भुत संगम है बिनसर

प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(8) संजय कुमार / कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय की गोद में बसा बिनसर एक खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र है, जो अपने जंगलों, शांत वातावरण, पक्षियों और हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचकर ऐसा महसूस हुआ मानो शहरों की भागदौड़ से दूर किसी दूसरी दुनिया…

प्रकृति से एक बार जुड़कर तो देखिए…(8)

संजय कुमार / कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय की गोद में बसा बिनसर एक खूबसूरत पहाड़ी क्षेत्र है, जो अपने जंगलों, शांत वातावरण, पक्षियों और हिमालयी चोटियों के मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां पहुंचकर ऐसा महसूस हुआ मानो शहरों की भागदौड़ से दूर किसी दूसरी दुनिया में आ गए हैं।

बिनसर की खासियत यह रही कि यहां की शांति को यदि कोई भंग करता मिला, तो वह पेड़ों के बीच से सुनाई देने वाली पक्षियों की आवाज। लेकिन कुछ देर ध्यान से सुनने पर यही आवाजें मन को भाने लगती हैं। पक्षियों की चहचहाहट, पत्तियों की सरसराहट और हवा के साथ पेड़ों के हिलने से एक ऐसे प्राकृतिक संगीत की रचना दिखी, जिसे सुनने के लिए किसी विशेष आयोजन की जरूरत नहीं है।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग के अनुसार, बिनसर वन्यजीव अभयारण्य लगभग 47 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। यह क्षेत्र प्राकृतिक वनस्पति और वन्यजीवों की विविधता के संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। बिनसर प्रकृति प्रेमियों, पक्षी अवलोकन करने वालों, वन्यजीव फोटोग्राफरों, लेखकों और शांत वातावरण में समय बिताने के इच्छुक लोगों के लिए आकर्षक गंतव्य है।

यहां पहुंचकर महसूस हुआ कि प्रकृति का आनंद लेने के लिए हमेशा किसी बड़े आयोजन या मनोरंजन की जरूरत नहीं। यहाँ, पेड़ों के बीच बैठकर पक्षियों की आवाज सुनना और दूर दिखाई देती पर्वत श्रृंखला को निहारना ही पर्याप्त है।

*हिमालय की चोटियों का अद्भुत नजारा*

बिनसर की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है हिमालय की विशाल पर्वत श्रृंखला का दृश्य। मौसम साफ होने पर यहां से नंदा देवी, त्रिशूल, चौखंभा, शिवलिंग और पंचाचूली जैसी चोटियों के दर्शन हुए। हालाँकि क्षेत्र और दृश्यता के अनुसार दूसरी हिमालयी चोटियां भी दिखाई दे सकती हैं। बिनसर की पहाड़ियों में झंडी धार क्षेत्र अपने मनोरम दृश्यों के लिए जाना जाता है। यहां से आसपास की पहाड़ियों, घाटियों और दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाओं का खूबसूरत नजारा दिखाई देता मिला।

बिनसर का जीरो पॉइंट भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां तक पहुंचने के लिए जंगल के बीच से पैदल रास्ता तय करना पड़ता है। रास्ते में पेड़ों, पत्तियों और पक्षियों की आवाजों के बीच चलने का अनुभव अपने आप में खास है। जीरो पॉइंट से मौसम साफ होने पर हिमालय की चोटियों का व्यापक दृश्य दिखाई देता है। यह अनुभव केवल तस्वीरों में कैद करने के लिए नहीं है। जब दूर बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों पर सूरज की रोशनी पड़ती है, तो उनकी सुंदरता मन को कुछ देर के लिए ठहरा देती है। ऐसे क्षण हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति की भव्यता के सामने मनुष्य कितना छोटा है। हालांकि, हिमालयी चोटियों की दृश्यता मौसम, बादलों और धुंध पर निर्भर करती है। इसलिए हर यात्रा में सभी चोटियों के स्पष्ट दर्शन हों, यह जरूरी नहीं…जारी

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

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