इंडोनेशिया से भारत तक तस्करी का नया कॉरिडोर: विलुप्ति की कगार पर गंभीर लुप्तप्राय मैलियो पक्षी

इंडोनेशिया के अद्भुत और स्थानीय वन्यजीवों के पीछे एक बढ़ता हुआ संकट है, जिस पर तुरंत वैश्विक ध्यान देने की आवश्यकता है। ‘जर्नल ऑफ एशियन ऑर्निथोलॉजी’ में 2026 में प्रकाशित दो नए अध्ययन एक चिंताजनक प्रवृत्ति को सामने लाते हैं: इंडोनेशिया से सीधे भारत तक अवैध वन्यजीव व्यापार के रास्तों का विस्तार। WTI की उत्तरा…

इंडोनेशिया के अद्भुत और स्थानीय वन्यजीवों के पीछे एक बढ़ता हुआ संकट है, जिस पर तुरंत वैश्विक ध्यान देने की आवश्यकता है। ‘जर्नल ऑफ एशियन ऑर्निथोलॉजी’ में 2026 में प्रकाशित दो नए अध्ययन एक चिंताजनक प्रवृत्ति को सामने लाते हैं: इंडोनेशिया से सीधे भारत तक अवैध वन्यजीव व्यापार के रास्तों का विस्तार।

WTI की उत्तरा मेंदिरत्ता द्वारा की गई रिसर्च से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी एक ऐसा नया खतरा है, जो ‘क्रिटिकली एंडेंजर्ड’ (गंभीर रूप से लुप्तप्राय) मैलियो (मैक्रोसेफालोन मैलियो) को विलुप्ति की कगार की ओर धकेल रहा है। इसके साथ ही, डेटा से यह भी पता चलता है कि बड़ी संख्या में ‘बर्ड्स-ऑफ-पैराडाइज’ (पैराडाइसेइडे) की तस्करी भारत में की जा रही है। यह दिखाता है कि कैसे विदेशी पालतू जानवरों (exotic pets) की मांग सीमाओं के पार जैव विविधता के नुकसान को बढ़ावा दे रही है। ये निष्कर्ष उन जटिल अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को उजागर करते हैं, जो पृथ्वी की कुछ सबसे अनोखी पक्षी प्रजातियों के लिए खतरा बनी हुई हैं।

इन प्रजातियों को बचाने के लिए सख्त कानून लागू करने, सीमाओं के पार जानकारी साझा करने और विदेशी पालतू जानवरों की मांग को रोकने के लिए कड़े नियमों की जरूरत है। किसी भी प्रजाति का खो जाना नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (ecosystem) को बिगाड़ देता है और यह ग्रह के लिए एक ऐसा नुकसान है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। इस व्यापार के पैमाने को समझने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें और जानें कि इन पक्षियों को बहुत देर होने से पहले बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्यों जरूरी है।

पूरा पेपर देखने के लिए QR कोड देखें।

From Indonesia to India: New 2026 Studies Expose Illegal Wildlife Route Threatening Maleo and Birds-of-Paradise

Behind Indonesia’s stunning endemic wildlife lies a growing crisis that demands immediate global attention. Two new 2026 studies published in the Journal of Asian Ornithology uncover a concerning trend: the expansion of illegal wildlife trade routes stretching directly from Indonesia to India. Research undertaken by Uttara Mendiratta from WTI, exposes international trafficking as a newly recognized threat pushing the Critically Endangered Maleo (Macrocephalon maleo) further toward extinction. Meanwhile, data also reveals alarming number of iconic birds-of-paradise (Paradisaeidae) being trafficked into India, illustrating how demand for exotic pets fuels biodiversity loss across boundaries. These findings highlight the sophisticated nature of transboundary operations that threaten some of Earth’s most unique avian species. Protecting these species requires stronger enforcement, cross-border information sharing, and stricter regulation against exotic pet demand. Every species lost disrupts fragile ecosystems and is an irreversible loss to the planet. Read the full findings to understand the scale of this trade and why international cooperation is vital to saving these birds before it’s too late.

Check out the full paper in the QRs.

(courtesy –https://www.facebook.com/WildlifeTrustOfIndia)

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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