“कचरा और खाली शराब की बोतलें: सुंदरता पर दाग”
संजय कुमार / उत्तराखंड, अल्मोड़ा के पहाड़ी इलाकों में कई जगहों पर प्राकृतिक सुंदरता के बीच यात्रा करते समय कुछ दृश्य ऐसे भी दिखाई दिए, जिन्होंने मन को खिन्न किया। रास्ते में कई स्थानों पर कचरा और खाली शराब की बोतलें फेंकी हुई मिलीं।

ये दृश्य पहाड़ों की खूबसूरती के बीच एक गंभीर विरोधाभास की तरह दिखें। एक ओर लोग दूर-दूर से पहाड़ों की स्वच्छ हवा, हरियाली और शांत वातावरण का आनंद लेने आते हैं, दूसरी ओर कुछ लोग वहीं प्लास्टिक, शराब बोतलें और अन्य कचरा छोड़ जाते हैं? जिस प्रकृति से हम मानसिक शांति प्राप्त करने पहुंचते हैं, उसी को अपने व्यवहार से नुकसान पहुंचाते हैं,खासकर स्थानीय लोगों को इससे ज्यादा पीड़ा होती है।
सड़क किनारे फेंका गया कचरा केवल देखने में बुरा नहीं लगता, बल्कि पर्यावरण के लिए भी समस्या पैदा करता है। प्लास्टिक लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है। कांच की टूटी बोतलें लोगों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाती हैं। खाद्य पदार्थों के अवशेष वन्यजीवों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। खुले में छोड़ा गया कचरा बारिश के पानी के साथ नालों और जलस्रोतों तक भी पहुंच रहा है। खाली शराब की बोतलें फेंकना भी गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है। पहाड़ी रास्तों पर कांच टूटने से दुर्घटना का खतरा बढ़ता है और प्राकृतिक स्थल गंदे होते हैं। यदि कचरा वन क्षेत्रों या उनके आसपास पहुंचता है, तो उसका प्रभाव जंगलों और वहां रहने वाले जीवों पर भी पड़ता है। इस समस्या का समाधान केवल प्रशासन या सफाई कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। प्रत्येक पर्यटक को अपने साथ निकलने वाले कचरे की जिम्मेदारी लेनी होगी। जहां कूड़ेदान उपलब्ध हों, उनका उपयोग करना चाहिए। अन्यथा कचरे को अपने साथ रखकर उचित निस्तारण स्थल तक ले जाना चाहिए।
प्रकृति में घूमने का एक सरल नियम होना चाहिए—जिस स्थान पर हम जाएं, उसे अपने आने से पहले की तुलना में अधिक गंदा न छोड़ें। यदि हर पर्यटक इस नियम का पालन करे, तो पहाड़ों की स्वच्छता बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।….जारी













