कैमूर में, जंगल की सुरक्षा का मतलब सिर्फ अतिक्रमण हटाना नहीं था। इसका मतलब था लोगों के मन में जंगल के प्रति फिर से विश्वास जगाना और,यह विश्वास जगाया आईएफएस विकास अहलावत ने। जंगल को अतिक्रमण से मुक्त कराया और सुरक्षा की पहल की ।
जब विकास अहलावत ने कार्यभार संभाला था तब वहां का इलाका अतिक्रमण, कर्मचारियों की कमी और सालों से चले आ रहे अनसुलझे मुद्दों से जूझना पड़ा। उन्होंने पहल बातचीत से शुरू की।
कैमूर के मुंडेश्वरी मंदिर के पास, वन भूमि पर लगभग 200 दुकानें बन गई थीं। उन्हें वहां से हटाने के बजाय, उनकी टीम ने उन्हें बसाने के लिए पास ही की सरकारी जमीन की पहचान की। और,जिला प्रशासन, स्थानीय प्रतिनिधियों और समुदाय के लोगों से बातचीत कर की, लोगों के बीच आपसी समझ बनायीं।
एक-एक करके गांवों में लोगों से मुलाकात की। कई ग्रामीण आगे आए और कहा कि अगर उनके मामलों का जल्द निपटारा कर दिया जाए, तो वे जंगल की जमीन पर खेती करना छोड़ देंगे। जो परिवार वन भूमि पर खेती कर रहे थे, उन्हें अपनी समस्याएं बताने और समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया गया। धीरे-धीरे, टकराव की जगह सहयोग ने ले ली।
पौधारोपण और जंगल को फिर से हरा-भरा करने के लिए 1,500 एकड़ से ज्यादा जमीन का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, मिट्टी और नमी के संरक्षण, सीमा तय करने और मैपिंग के जरिए जंगल की सुरक्षा को और मजबूत किया गया। और जब तेंदू पत्तों की अवैध तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पड़ी, तो 15 घंटे चले एक ऑपरेशन में 15 गाड़ियां जब्त की गईं और 10 आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। अहलावत इस काम का श्रेय अपनी टीम और उन लोगों को देते हैं जिन्होंने इसमें सहयोग किया।
अब विकास अहलावत वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में तैनात, उनका यह सफर दिखाता है कि जंगल की स्थायी सुरक्षा सिर्फ सख्ती से नहीं, बल्कि भरोसे से शुरू होती है। (साभार –IndianMasterminds)














