राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन दिवस पर अररिया में जागरूकता कार्यक्रम

अररिया, 5 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन (Gangetic Dolphin) दिवस के अवसर पर अररिया जिले में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया । अलमनार एजुकेयर, अररिया में विद्यार्थियों के बीच विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को गांगेय डॉल्फिन के महत्व, उसके संरक्षण तथा नदी पारिस्थितिकी…

अररिया, 5 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन (Gangetic Dolphin) दिवस के अवसर पर अररिया जिले में व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया ।

अलमनार एजुकेयर, अररिया में विद्यार्थियों के बीच विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को गांगेय डॉल्फिन के महत्व, उसके संरक्षण तथा नदी पारिस्थितिकी तंत्र में उसकी भूमिका से अवगत कराना था। इस अवसर पर विद्यार्थियों को बताया गया कि अररिया जिले में बहने वाली पनार नदी में 100 से अधिक गांगेय डॉल्फिन पाई जाती हैं। स्थानीय लोग डॉल्फिन को “सोंसा” के नाम से जानते थे । विशेषज्ञों के अनुसार गांगेय डॉल्फिन दृष्टिहीन (Blind) होती है और Echolocation तकनीक के माध्यम से अपना मार्ग खोजती है तथा मछलियों का पता लगाती है।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि डॉल्फिन का अस्तित्व किसी नदी के स्वस्थ होने का महत्वपूर्ण संकेत है। डॉल्फिन केवल जीवित एवं अपेक्षाकृत स्वच्छ नदियों में पाई जाती है, जबकि अत्यधिक प्रदूषित या मृतप्राय जल में इसका अस्तित्व संभव नहीं होता। इसलिए डॉल्फिन का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि मछुआरा समुदाय और नदी आधारित आजीविका के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। विद्यार्थियों को जानकारी दी गई कि अररिया के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं “डॉल्फिन मैन ऑफ अररिया” के नाम से जाने जाने वाले सुदन सहाय लगातार पनार नदी क्षेत्र में डॉल्फिन संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने इस क्षेत्र को डॉल्फिन सैंक्चुअरी घोषित करने तथा डॉल्फिन व्यू प्वाइंट्स विकसित करने की मांग भी उठाई है। इस दिशा में सरकार द्वारा भी विभिन्न पहलें की जा रही हैं।

कार्यक्रम में विशेष रूप से मछुआरों और स्थानीय समुदाय के बीच जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। जानकारी के अभाव में अब तक लगभग 12 डॉल्फिनों की मृत्यु हो चुकी है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।अलमनार एजुकेयर की एक विशेष पहचान यह भी है कि विद्यालय की कक्षा 3 के विभिन्न सेक्शनों के नाम संकटग्रस्त (Endangered) जीवों के नाम पर रखे गए हैं, जिनमें एक सेक्शन का नाम “Dolphin” भी है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि इस प्रकार की पहल बच्चों में जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने गांगेय डॉल्फिन एवं नदी संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

वहीँ , गांगेटिक डॉल्फिन दिवस के अवसर पर +2 बालिका उच्च विद्यालय अररिया के छात्राओं को परमान नदी के त्रिशुलिया घाट पर डॉल्फिन दिखलाया गया एवम डॉल्फिन के महत्व के बारे में बतलाया गया साथ ही जल को प्रदूषित होने से बचाने हेतु लोगों को जागरूक करने को बताया गया ।मौके पर +2 बालिका उच्च विद्यालय अररिया के शिक्षकगण , छात्राओं के साथ वनरक्षी गौरव कुमार, अभिषेक कुमार,खुशबू कुमारी एवम अन्य वनकर्मी उपस्थित रहे। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय अररिया में राष्ट्रीय डाल्फिन दिवस पर विद्यालय के बच्चों को प्रातः सभा में विद्यालय के कला शिक्षक मूर्तिकार राजेश कुमार ने अररिया के पनार नदी में पाए जाने वाले जलीय जीव गांगेटिक डाल्फिन की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए व अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि गंगा और अररिया के पनार नदी में गांगेटिक डाल्फिन की उपलब्धता ईको सिस्टम मानक के रूप में देखा जा सकता है। अररिया के पर्यावरणविद् सूदन सहाय की चर्चा करते हुए बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया। इसके लिए नद्जल को अविरल प्रवाह बनाये रखने और नदी में कूड़ा-कचड़ा(सालिड वेस्ट) फेंकना व अनुष्ठानिक प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमा का विसर्जन पर प्रतिबंध जरूरी हो जाता है।

दूसरी ओर, राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर अररिया पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को गांगेय डॉल्फिन, नदी संरक्षण एवं जलीय जैव-विविधता के प्रति जागरूक करने हेतु विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं डॉल्फिन संरक्षण अभियान आयोजित किया गया। जागरूकता सभा एवं सेमिनार में विद्यार्थियों ने नदी प्रदूषण, डॉल्फिन संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी के महत्व को समझा। पोस्टर एवं पेंटिंग प्रतियोगिता में नन्हे कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से सशक्त संदेश दिया।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

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