डॉल्फिन संरक्षण पर वेबिनार का आयोजन

“राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र पटना ने राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर बिहार में डॉल्फिन संरक्षण व्यावहारिक बचाव तैयारी, निगरानी और समन्वित नदी संरक्षण पर वेबिनार का आयोजन किया”। पटना / राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र, की ओर से 05.10.2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर बिहार में डॉल्फिन संरक्षण…

“राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र पटना ने राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर बिहार में डॉल्फिन संरक्षण व्यावहारिक बचाव तैयारी, निगरानी और समन्वित नदी संरक्षण पर वेबिनार का आयोजन किया”।

पटना / राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र, की ओर से 05.10.2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस के अवसर पर बिहार में डॉल्फिन संरक्षण व्यावहारिक बचाव तैयारी, निगरानी और समन्वित नदी संरक्षण पर वेबिनार का आयोजन किया गया। आयोजित बैठक में टीएसए फाउंडेशन इंडिया के निदेशक डॉ. शैलेन्द्र सिंह विशेषज्ञ वक्ता के रूप में डॉल्फिन पर विस्तार से प्रकाश डाला । इसमें भोजपुर, पटना, बेगूसराय, मुंगेर, भागलपुर, सहरसा, पूर्णियां, मोतिहारी, गोपालगंज और वैशाली के वन प्रमंडल पदाधिकारी, वनपाल, वनरक्षी पटना जू के प्रतिभागियों ने भाग लिया। संवाद में डॉल्फिन बचाव एवं पुनर्वास, नदीय आवास प्रबंधन, क्षेत्रीय निगरानी, अंतर्विभागीय समन्वय और सहवर्ती जलीय जीवों के संरक्षण पर चर्चा हुई।

डॉ. सिंह ने उत्तर प्रदेश के अनुभवों के आधार पर सुरक्षित मैनुअल पकड़, हैंडलिंग, परिवहन, विमोचन स्थल के चयन और विमोचन पश्चात् निगरानी की प्रक्रिया को साझा किया। उन्होंने डॉल्फिन एम्बुलेंस, हॉटस्पॉट एवं नहर मानचित्रण, ध्वनिक पहचान, पशु चिकित्सा तैयारी और स्थानीय स्तर पर डॉल्फिन के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए संसु साथी मुहिम तथा सामुदायिक सूचना तंत्र पर प्रकाश डाला।

निदेशक, राष्ट्रीय डॉल्फिन शोध केन्द्र, पटना डॉल्फिन एवं अन्य जलीय जीवों की रक्षा के लिए जल्द ही मुख्यालय तथा क्षेत्रीय स्तर पर प्रशिक्षण देने की बात कही तथा इसी के साथ सभी प्रतिभागियों को सधन्यवाद करते हुए बैठक का समापन किया।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन