पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव बने नरेंद्र भूषण

नई दिल्ली ,01 अक्तूबर 2026/ उत्तर प्रदेश कैडर के 1992 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी नरेंद्र भूषण ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव का पदभार संभाल लिया है। श्री भूषण को केंद्र और राज्य सरकारों में तीन दशकों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है। उन्हें ऊर्जा, बुनियादी…

नई दिल्ली ,01 अक्तूबर 2026/ उत्तर प्रदेश कैडर के 1992 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी नरेंद्र भूषण ने भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव का पदभार संभाल लिया है।

श्री भूषण को केंद्र और राज्य सरकारों में तीन दशकों से अधिक का प्रशासनिक अनुभव है। उन्हें ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, उद्योग, कृषि, शहरी विकास, वित्त और भूमि-संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों में व्यापक अनुभव है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव के रूप में उनकी नियुक्ति ग्रामीण विकास मंत्रालय में भूमि संसाधन विभाग के सचिव के तौर पर उनके कार्यकाल के बाद हुई है।

करियर विवरण

उत्तर प्रदेश कैडर में अपनी सेवा के दौरान, श्री भूषण ने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया है, जिनमें ऊर्जा और अपर ऊर्जा स्रोत तथा तकनीकी शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव का पद शामिल है। इससे पहले, उन्होंने पीडब्ल्यूडी, बुनियादी ढांचा एवं उद्योग विकास, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिकी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तथा पंचायती राज विभागों में प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। श्री भूषण के पास काफी फील्ड अनुभव भी है; उन्होंने मथुरा, फिरोजाबाद और उधम सिंह नगर के जिला मजिस्ट्रेट के रूप में कार्य किया है।

भारत सरकार के स्तर पर, श्री भूषण ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) में उप महानिदेशक, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा प्रबंधन में मिशन निदेशक और कृषि एवं सहयोग विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया है। उन्होंने वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत भारतीय व्यापार संवर्द्धन  संगठन (आईटीपीओ) में विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) के रूप में भी काम किया है।

श्री भूषण के पास इलेक्ट्रॉनिकी में स्नातक डिग्री और अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल डेवलपमेंट पॉलिसी में मास्टर डिग्री है। उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग में पब्लिक फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट-चेंज की तैयारी से जुड़े प्रोग्राम शामिल हैं।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

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