पर्यावरणीय योद्धाओं को मिला ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार

नई दिल्ली /केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 29 सितम्बर को नई दिल्ली में चौथे ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार समारोह और ‘इको वॉरियर’ सम्मेलन की  अध्यक्षता की। इन कार्यक्रमों को भारतीय वन सेवा संघ (आईएफएसए) और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ ने आयोजित किया। वन, वन्यजीवन और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने…

नई दिल्ली /केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 29 सितम्बर को नई दिल्ली में चौथे ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार समारोह और ‘इको वॉरियर’ सम्मेलन की  अध्यक्षता की। इन कार्यक्रमों को भारतीय वन सेवा संघ (आईएफएसए) और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ ने आयोजित किया। वन, वन्यजीवन और पर्यावरण संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान को सम्मानित करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ वन अधिकारियों, संरक्षणवादियों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों और उद्योग जगत के दिग्गजों ने हिस्सा लिया।श्री भूपेंद्र यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के वन, वे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय अवसंरचनाएं हैं जो जल, जलवायु, मिट्टी, जैव विविधता और आजीविका में सहायता करते हैं। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के योगदान की सराहना करने के साथ ही संरक्षण भागीदारों के रूप में जनजातीय तथा वन पर निर्भर समुदायों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संरक्षण अधिक जटिल हो गया है। वन अधिकारियों को विकास, आजीविका, मानवीय आकांक्षाओं और वन्यजीवों की जरूरतों को संतुलित करते हुए संपूर्ण पारिस्थितिकीय परिदृश्यों का प्रबंधन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, बार-बार होने वाली और अप्रत्याशित चरम मौसम की घटनाएं, दावानल, जल तनाव, पर्यावास विखंडन और आक्रामक प्रजातियां उभरती हुई चुनौतियां हैं। उन्होंने एक ऐसे परिदृश्य दृष्टिकोण का आह्वान किया जो वनों, वन्यजीवों, कृषि, जल, आजीविका और मानव बसावटों को एक साथ जोड़ता है।

श्री यादव ने कहा कि संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। उन्होंने भारतीय वन सेवा को भारत की प्राकृतिक पूंजी की देखरेख का जिम्मा संभालने वाली सेवा बताया। उन्होंने उन बीट गार्ड, रेंजर्स तथा अन्य कर्मचारियों सहित अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों के योगदान की सराहना की जो वनों की गश्त करते, दावानल से निपटते और वन्यजीव आवासों की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों के योगदान को कभी नहीं भुलाया जाना चाहिए। वे ऐसे लोग हैं जो संरक्षण नीति को जमीन पर संरक्षण में बदलते हैं।केन्द्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि ‘इको वॉरियर’ पुरस्कार प्रचार के बिना साहस, सराहना के बिना सेवा और तत्काल लाभों के बिना प्रतिबद्धता को सम्मानित करते हैं। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार कई अन्य लोगों को भारत के वनों, वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए काम करने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की संरक्षण यात्रा दुनिया के सामने यह प्रदर्शित करती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।पुरस्कार समारोह के दौरान, श्री यादव ने कर्नाटक कैडर के 1976 बैच के आईएफएस  अधिकारी श्री बृज किशोर सिंह को वन और वन्यजीव संरक्षण में उनके दशकों लंबे योगदान की सराहना में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ (आजीवन उपलब्धि पुरस्कार) प्रदान किया। अपने करियर के दौरान, श्री सिंह ने कर्नाटक में वन सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने के अलावा, चंदन की तस्करी और कुख्यात डाकू वीरप्पन की गतिविधियों से निपटने के प्रयासों में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इको वॉरियर पुरस्कार विजेता

इन पुरस्कारों के माध्यम से कई श्रेणियों के तहत वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया:

संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन

  • डॉ. प्रकाश चंद गोगिनेनी, वन संरक्षक एवं प्रभारी क्षेत्र निदेशक, सिमलीपाल बाघ अभ्यारण्य, ओडिशा
  • श्री मनीष सिंह, डीएफओ (प्रभागीय वन अधिकारी), पीलीभीत बाघ अभ्यारण्य, उत्तर प्रदेश

तकनीक, सुरक्षा उपायों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से बाघ और वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए सम्मानित किया गया।

वन्यजीव सुरक्षा और संरक्षण

  • सुश्री सेल्वी एस. सेनबगाप्रिया, डीसीएफ (आनुवंशिकी), कोयंबटूर, तमिलनाडु
  • डॉ. संजीव शर्मा, डीसीएफ, पालमपुर वन प्रभाग, हिमाचल प्रदेश

समुदाय-आधारित संरक्षण, वैज्ञानिक निगरानी, ​​वन्यजीव बचाव और पुनर्वास, तथा अवैध शिकार-रोधी अभियानों के लिए सम्मानित किया गया।

पर्यावरण संरक्षण

  • श्री धर्म सिंह मीणा, वन संरक्षक, भागीरथी सर्कल, उत्तराखंड
  • श्री सुमन शिवशंकर शिवाचार डब्ल्यू.एम., डीएफओ, वोखा, नागालैंड

वैज्ञानिक जल संरक्षण और झरनों व जलधाराओं के पुनरुद्धार के लिए तथा अमूर फाल्कन (बाज) की सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और दोयांग जलाशय के संरक्षण के लिए सम्मानित किया गया।

सामुदायिक जुड़ाव

  • श्री धवन कुमार रावत, डीएफओ, पक्के बाघ अभ्यारण्य, अरुणाचल प्रदेश
  • श्री गुरहर्ष सिंह, डीसीएफ, रामपुर, हिमाचल प्रदेश

संरक्षण को सामुदायिक आजीविका से जोड़ने और समेज बादल फटने की घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों को सुगम बनाने के लिए मात्र छह घंटे के भीतर लकड़ी के पुल का निर्माण करने के लिए सम्मानित किया गया।

प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम उपयोग

  • श्री एन. जयराज, वन्यजीव वार्डन, होसुर, तमिलनाडु
  • श्री रामसुंदर एम., निदेशक, राजगीर ज़ू सफारी, बिहार

संवेदनशील रेलवे मार्ग के पास हाथियों की सुरक्षा के लिए एआई आधारित निगरानी और पूर्व-चेतावनी प्रणालियों के उपयोग, साथ ही डिजिटल बुकिंग, सीसीटीवी निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग के लिए सम्मानित किया गया।

स्पेशल जूरी अवॉर्ड (विशेष जूरी पुरस्कार)

  • सुश्री सविता दहिया, डीसीएफ, बाड़मेर, राजस्थान
  • सुश्री के. कार्तिकेयनी, डीएफओ, तंजावुर, तमिलनाडु

‘ताल छापर’ घास के मैदानों के पुनरुद्धार और काले हिरणों (ब्लैकबक) तथा चिंकारों के प्राकृतिक वास में सुधार के लिए एवं एक ऐसे अभियान के लिए सम्मानित किया गया जिसने हाथियों की सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ उस क्षेत्र से 239 अवैध बंदूकों को हटाया।

विशेष परियोजना के लिए सम्मान

विशेष परियोजना पुरस्कार के तहत राजस्थान में ‘प्रोजेक्ट एलिफ़ेंट’ और ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड संरक्षण प्रोजेक्ट’ को प्रजातियों और उनके रहने की जगहों के संरक्षण में उनके अहम योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इको वॉरियर कॉन्क्लेव में पर्यावरण शासन और संरक्षण के उभरते व महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित तीन पैनल चर्चाएँ शामिल थीं:

  • संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए एआई और प्रौद्योगिकी;
  • वन प्रबंधन में कॉरपोरेट्स की भूमिका;
  • संवहनीय विकास और पर्यावरणीय नैतिकता।

इन चर्चाओं में विशेषज्ञों और हितधारकों को एक साथ लाया गया ताकि संरक्षण के परिणामों को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी, कॉर्पोरेट भागीदारी और संवहनीय  विकास के दृष्टिकोण का उपयोग करने में शामिल अवसरों और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया जा सके। इस आयोजन के हिस्से के रूप में भारत भर के सरकारी अधिकारियों द्वारा खींची गई प्रकृति की तस्वीरों की एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

इस कार्यक्रम में वानिकी और संरक्षण क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया, जिनमें श्री सुशील कुमार अवस्थी, महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय); श्री भारत लाल, पूर्व महासचिव एनएचआरसी; सुश्री अनिता कर्ण, अध्यक्ष, आईएफएसए; सुश्री मोनालिसा दास, महासचिव, आईएफएसए; और ‘इंडियन मास्टरमाइंड्स’ के प्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल थे।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

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