“बिहार के पर्यावरण स्तंभ” पुस्तक का हुआ लोकार्पण

पटना :-26/08/2026/ बिहार विधान परिषद सभागार में निशांत रंजन अदिति रॉय तथा अमित कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित बिहार के पर्यावरणविदों के जीवनी एवं कार्यों पर आधारित पुस्तक “बिहार के पर्यावरण स्तंभ” का लोकार्पण डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, मंत्री, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा खान एवं भूतत्व विभाग बिहार सरकार के करकमलों द्वारा किया गया।मौके…

पटना :-26/08/2026/ बिहार विधान परिषद सभागार में निशांत रंजन अदिति रॉय तथा अमित कुमार पाण्डेय द्वारा लिखित बिहार के पर्यावरणविदों के जीवनी एवं कार्यों पर आधारित पुस्तक “बिहार के पर्यावरण स्तंभ” का लोकार्पण डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी, मंत्री, कला, संस्कृति एवं युवा विभाग तथा खान एवं भूतत्व विभाग बिहार सरकार के करकमलों द्वारा किया गया।
मौके पर मंत्री डॉ प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि आज के मोबाइल युग में जहां युवा किताबों से दूर होते जा रहे हैं वैसे में युवा का लेखन में रुचि लेना प्रदेश के लिए गौरव की विषय है। पर्यावरण नायकों का जीवनी हमारे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत का काम करेगा और उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रास बिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि इस पुस्तक में पर्यावरण के लिए अपने पूरे जीवन को समर्पित कर देने वाले 35 नायकों के कार्य को संकलित करने का बेहतरीन कार्य किया गया है, हमारे युवा पीढ़ी इससे बहुत लाभान्वित होगी।

पद्मश्री प्रो. रविंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि हम सभी को जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे पूरा करने के लिए की जान से कोशिश करना चाहिए। लेखकों ने भी इस पुस्तक को पूरा करने में काफी मेहनत की है वे बधाई के पात्र हैं।

पक्षी विशेषज्ञ अरविंद मिश्रा ने कहा कि बिहार में पर्यावरणविदों की जीवनी के संकलन का एक अनूठा कार्य है, हमें आशा है कि दूसरे राज्य भी इससे प्रेरणा लेकर अपने राज्य में भी इसे लागू करने का प्रयास करेंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. संजय पासवान ने कहा कि हम सब के अंदर पर्यावरण के साथ जीने की ललक होती है लेकिन हम लोग ही उसे पहचान नहीं पाते हैं, लेखकों ने अपने प्रयास से हर व्यक्ति को पर्यावरण के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने का प्रेरणा स्रोत तैयार किया है।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना के पूर्व प्राचार्य प्रो. संतोष कुमार ने कहा कि हमारे समय में पर्यावरण संरक्षण को लोग सरकार के कार्य समझते थे लेकिन समय के साथ सोच बदल और लोग इसे जुड़ते चले गए।

प्रो. चंद्रावती कुमारी ने कहा कि जब मैंने विभागाध्यक्ष का पद संभाला था तो बच्चों को पर्यावरण विज्ञान के शिक्षा के लिए बहुत प्रोत्साहित करना पड़ता था, इस पुस्तक में मेरे कई छात्रों के कार्य को भी संकलित किया गया है जो मेरे लिए बहुत ही कर्म का विषय है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रस बिहारी प्रसाद सिंह तथा संचालन सुप्रिया सिन्हा ने किया। मौके पर अर्जुन मंडल, प्रो. बिहारी सिंह, राजीव रंजन शुक्ला, सत्येंद्र कुमार, शहला यास्मीन, शानू कुमार राज, सभ्यता कुमारी सहित बड़ी संख्या में पर्यावरणविद शामिल हुए ।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन