गौरैया गन्दा या सड़ा हुआ पानी नहीं पीती। वह बहुत समझदार और साफ-सफाई पसंद करने वाली छोटी चिड़िया है। गन्दा और सड़ा पानी में बैक्टीरिया, कीड़े आदि होते हैं । गलती से गौरैया ने अगर एक बार गंदा पानी पी ली तो इंफेक्शन या बीमारी होना तय है। प्रकृति ने उसे खतरों से बचने का सेंस दिया है। उसे यह पता है, इसलिए हमेशा साफ पानी ही ढूंढती है। सुबह सुबह घास पर जमे ओस की बूंद और बीज कोा आहार बनाती है। पत्ते पर जमा पानी, या मिट्टी के बर्तन का साफ पानी उसे पसंद है।
प्राकृतिक जल स्रोत झरने, नदी के किनारे या बारिश के बाद जमा साफ पानी पीती है और उसमें स्नान भी करती है । जहां पानी में बदबू, तेल या कचरा दिखे वहां वो चोंच भी नहीं लगाती। आदतन गौरैया धूल स्नान और पानी स्नान दोनों करती है। गंदे पानी से नहाने पर उसके पंख खराब हो सकते है और कीड़े लग सकते हैं । इसलिए वो साफ जगह ही चुनती है। कभी नाले का पानी पीते या उसमें नहाते नहीं देखा जा सकता है।
गौरैया के लिए अगर आप घर-आँगन,बालकोनी, छत या खुले में पानी रखना चाहें तो-मिट्टी का बर्तन सबसे अच्छा है- पानी ठंडा रहता है और गंदगी नीचे जम जाता है । रोज पानी बदलें – बासी पानी मत छोड़ें। गंदे नाले या टंकी का रुका पानी गौरैया नहीं छुएगी। गौरैया हमें सिखाती है कि छोटा जीवन भी साफ-सफाई और सेहत को कितनी अहमियत देता है।















