संजय कुमार / गौरैया आराम करते समय अपनी चोंच को पंखों के नीचे दबा लेती है। इसे “head-tucking” कहते हैं। गौरैया यह इसलिए करती है ताकि अपने शरीर को गर्म रख सकें । गौरैया के चोंच और सिर सबसे ज्यादा गर्मी छोड़ते हैं,इसलिए वह ऐसा करती है । चोंच को पंखों के नीचे दबाने से…
संजय कुमार / गौरैया आराम करते समय अपनी चोंच को पंखों के नीचे दबा लेती है। इसे “head-tucking” कहते हैं। गौरैया यह इसलिए करती है ताकि अपने शरीर को गर्म रख सकें । गौरैया के चोंच और सिर सबसे ज्यादा गर्मी छोड़ते हैं,इसलिए वह ऐसा करती है । चोंच को पंखों के नीचे दबाने से शरीर की गर्मी बची रहती है, खासकर सर्दी में।
आराम और नींद के लिए जब गौरैया तार, पेड़ की टहनी या घोंसले में सोती है तो एक पैर पर खड़ी होकर सिर को पीठ के पंखों में छिपा लेती है। इससे गर्दन को भी आराम मिलता है। सुरक्षा के लिए आंख बंद और चोंच छिपी होने से शिकारी पक्षियों को कम दिखती है। शरीर छोटा और गोल लगने लगता है। सोते समय – रात में या झपकी लेते समय, आराम करते समय – धूप सेंकते हुए या बारिश के बाद सुस्ताने पर, ठंड लगने पर – पंख फुलाकर और चोंच छिपाकर रहती है । गौ। रैया धूल ,धूप और पानी से स्नान के बाद पंखों और शरीर से परजीवी भी चोंच से हटाती है। ऐसा करते हुए वह चोंच को पंख के नीचे छुपा सो भी जाती है।
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारागौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें:ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।