घरेलू गौरैया : शारीरिक बनावट

संजय कुमार / आइये जानते हैं घरेलू गौरैया के शरीर की जानकारी किसे क्या कहते हैं- upper tail coverts (ऊपरी पूँछ का आवरण), Tail (पूँछ), under tail coverts (पूँछ के आवरण के नीचे), primaries (प्राथमिक), Vent (वायु द्वार-बाहर निकलने का मार्ग), Flank (शरीर का पार्श्व भाग), Belly(पेट), Toe (पैर की अंगुली), Claw (पंजा), Primary coverts…

संजय कुमार / आइये जानते हैं घरेलू गौरैया के शरीर की जानकारी किसे क्या कहते हैं- upper tail coverts (ऊपरी पूँछ का आवरण), Tail (पूँछ), under tail coverts (पूँछ के आवरण के नीचे), primaries (प्राथमिक), Vent (वायु द्वार-बाहर निकलने का मार्ग), Flank (शरीर का पार्श्व भाग), Belly(पेट), Toe (पैर की अंगुली), Claw (पंजा), Primary coverts (प्राथमिक गुप्त), Greater coverts (ग्रेटर गुप्त), Alula (bastard wing)(अलूला -बैस्टर्ड विंग), Lower breast (निचला स्तन), Median coverts (बीच का छिपा हुआ), Breast side (स्तन पक्ष), lesser coverts (कमतर छिपा हुआ), Chest upper, Throat, Chin(ठोड़ी), Lower mandible, Bill (चोंच), Upper mandible, Fore head(माथा), Crown(मुकुट), Nape(गर्दन के पीछे का हिस्सा ), Ear coverts, Neckside, Hindneck (गर्दन का पिछला हिस्सा), mantle (आच्छादन),, Scapulars (स्कापुलार्स), Back (पीछे), Tertials (तृतीय पिच्छ),, Secondaries (द्वितीयक), Rump (दुम), Belly(पेट),

वजन : गौरैया ज्यादा तापमान और सर्दी बर्दास्त नहीं कर पाती, इससे उसकी मौत भी हो जाती है। गौरैया पक्षी का वजन कम से कम 23 से 40 ग्राम होता है। गौरैया प्रति दिन 2 से 6 ग्राम दाना चुगती हैं। गौरैया की जुबान में एक अतिरिक्त हड्डी होती है, जो अन्य पक्षियों में नहीं होती, यह हड्डी उनकी जुबान को मजबूत बनाती है।

पंख : घरेलू गौरैया के शरीर पर पंख उगते हैं। पंख का सिरा त्वचा में धँसा होता है और जिससे वे लगातार रक्त का पोषण प्राप्त करते हैं, जो उनके शरीर में संचारित होता है। जब पंख पूरी तरह विकसित हो जाते हैं, तो त्वचा से जुड़ा हुआ उनका सिरा अलग हो जाता है और धीरे-धीरे पंख मर जाता है। नए पंख के उगने के साथ ही पुराना चमड़ा बाहर निकल जाता है और उसके बाद नया पंख आ जाता है। ऐसा साल में एक या दो बार होता है। घरेलू गौरैया हमेशा चोंच से पंखों की सफाई में सक्रिय रहती है। यह एक दैनिक पंख सफाई गतिविधि है, यह धूल और बैक्टीरिया/कीड़े/जूं आदि से छुटकारा दिलाती है।

एक गौरैया को दो डैना होता है, एक डैना में 16 पंख होते हैं, यानि दोनों मिला कर 32 पंख होते हैं। वहीँ, पूंछ में 6-6 यानि 12 पंख होते हैं। यह नर और मादा दोनों में बराबर होता है। हालांकि, मादा गौरैया, नर गौरैया से आकार में छोटी होती है।

रंग: नर और मादा गौरैया के ऊपरी भाग भूरे और निचले भाग हल्के पीले रंग के होते हैं। पुरुष के गले के पास एक काली बिब होती है। ग्रे रंग का मुकुट और दुम होता है, और चोंच सिल्वर-ग्रे होता है।

बिब : नर गौरैया के गले और स्तन पर अलग-अलग मात्रा में कालापन होता है। सबसे बड़े काले धब्बे (बिब्स) वाले गौरैया में टेस्टोस्टेरोन का स्तर उच्चतम होता है और वे मादा गौरैया के लिए अधिक आकर्षक होते हैं। प्रजनन के मौसम के बाहर, बिब भूरे पंखों से ढका रहता है।

बिल (चोंच) : मोटी, शंकु के आकार की चोंच एवं मांसल जीभ से आहार को छीलने एवं निगलने की स्थिति में लाने में मदद करती है। साथ ही गिजार्ड (The gizzard) (गला/कंठ/पेषणी) यानि पक्षियों का मांसपेशीय उदर, जिसमें निगले हुए कंकड़ बीजों को तोड़ कर पचाने में सहायक होते हैं। यह पेट का दूसरा कक्ष है और इसमें बहुत सख्त मांसपेशियां होती हैं। इन मांसपेशियों का उपयोग विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों को पीसने और पचाने के लिए किया जाता है। मांसपेशियाँ इस प्रक्रिया को अकेले नहीं करतीं। कई पक्षी भोजन करते समय छोटे-छोटे कंकड़, रेत या मिट्टी उठा लेते हैं और ये वस्तुएं गिजार्ड में चली जाती हैं। फिर गिजार्ड पाचन में सहायता के लिए खाद्य पदार्थों को चूर्णित करने में मदद करने के लिए इन ग्रिट जैसी वस्तुओं का उपयोग करता है। विभिन्न पक्षी प्रजातियाँ अलग-अलग खाद्य पदार्थ खाती हैं और उनके गिजार्ड विशेष रूप से उनके द्वारा खाए जाने वाले भोजन के प्रकार पर काम करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इसकी चोंच 1.1-1.5 सेमी (0.43-0.59 इंच) की कलमेन लंबाई के साथ मजबूत और शंक्वाकार है। गौरैया की चोंच बहुत मजबूत होती है। युवा अवस्था में घरेलू नर-मादा गौरैया की चोंच का रंग हलका गुलाबी होता है। लेकिन, जैसे जैसे प्रजनन काल आता है गहरा भूरा (काला) हो जाता है। नर और मादा के चोंच के ऊपर रोमछिद्र होता है। चोंच के चारों ओर, गले पर एवं चोंच और आंखों के बीच की जगह पर काला रंग होता है। शीर्ष के बीच एक छोटी सफेद धारी होती है और आंखों के ठीक पीछे छोटे सफेद धब्बा होता है, जिनके नीचे और ऊपर काले धब्बे होते हैं। नीचे के हिस्से हल्के भूरे या सफेद होते हैं, जैसे गाल, कान के आवरण और सिर के आधार पर धारियां होती हैं। नर गौरैया के ऊपर से लेकर पीछे तक गहरे भूरे रंग का मुकुट होता है। सर के किनारों पर भी मुकुट गहरा भूरे रंग का होता है। पीठ का ऊपरी हिस्सा भी भूरे रंग का होता है, जिसमें चौड़ी काली धारियां होती हैं, पीठ, दुम और ऊपरी पूंछ का आवरण भूरे रंग का होता है। घरेलू गौरैया के पंख अधिकतर भूरे और भूरे रंग के विभिन्न रंगों के होते हैं मादा गौरैया ऊपर और नीचे से मटमैली होती है।

पहचान : नर गौरैया के गले पर जो काला धब्बा होता है, उसे बिब कहा जाता है। मादा के गले के नीचे कोई धब्बा नहीं होता, सिर्फ सोनकंठी गौरैया को छोड़ कर। युवा अवस्था में नर और मादा दोनों गौरैया का चोंच हल्का गुलाबी होता है।

गौरैया की आंख : गौरैया पक्षी की आंखो की रेटिना में प्रति वर्ग मिलीमीटर 3 लाख फोटोसिसेप्टर होते है। ’गौरैया की आंख के रेटिना में 4 लाख फोटोरिसेप्टर प्रति वर्ग मिली मीटर होती है। देखने और सुनने की गजब झमता है। यह खतरे को दूर से भांप लेती है ।

पूँछ : इसकी पूँछ छोटी, 5.2-6.5 सेमी (2.0-2.6 इंच) लंबी होती है। पंखों का फैलाव 19-25 सेंटीमीटर (7.5-9.8 इंच) तक होता है। विंग कॉर्ड 6.7-8.9 सेमी (2.6-3.5 इंच) है, और टार्सस 1.6-2.5 सेमी (0.63-0.98 इंच) है।

पंजे एवं चोंज : गौरैया अपने पंजे एवं चोंज से शरीर की साफ-सफाई-मसाज करती है। शरीर में बाहरी तत्वों को पंजे एवं चोंज से हटाती है। कह सकते हैं कि खुजलाने का काम भी करती है। पंजे से सिर के उपरी हिस्से की साफ-सफाई व मसाज करती है जबकि चोंज से पंख और शरीर की सफाई करती हैं। विशेषग्य मानते हैं कि चोंज से शरीर के हिस्सों में एक्यूप्रेशर कर खुद शरीर को स्वस्थ रख उसका ख्याल रखती है।

पैर : घरेलू गौरैयाके एक पैर में चार अंगुलियाँ होती है दोनों पैर को मिला आठ अंगुलियाँ होती हैं। पैर के आगे तीन और पीछे एक अंगुली होती हैं। घरेलू गौरैया के पैर हल्के गुलाबी रंग के होते हैं। जबकि पीले गले वाली गौरैया के पैर के रंग गहरा भूरा होता है। तीन आगे एवं एक पीछे अंगुली होने से जब ये पेड़/तार पर बैठती हैं, तो पेड़ की शाखा/टहनी/तार पर पकड मजबूती से बनाती है। और बिना हिले डुले घंटों पेड़ पर बैठे रह सकती है। रात हो या दिन ये ऐसा ही कई घंटों आराम भी करती हैं। गौरैया के अलावे कौवा, कबूतर, तोता, मैना, रॉबिन जैसे पक्षियों के पैरों में भी तीन उंगलियां सामने और एक पीछे की ओर होती है। गौरैया के अपेक्षाकृत मजबूत पैर उसे जमीन पर छलांग लगाने और सुरक्षित रूप से पकड़ने में सक्षम बनाते हैं, लेकिन चलने या भोजन पकड़ने के लिए उनका बहुत कम उपयोग होता

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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