ग्लॉ झील बनी भारत की 101वीं रामसर साइट

पूर्वी हिमालय की अनछुई खूबसूरती को मिली वैश्विक पहचान,अरुणाचल प्रदेश का अपना पहला रामसर स्थल संजय कुमार / अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट के रूप में ग्लॉ झील का चयन, 150 से अधिक वृक्ष और 49 ऑर्किड प्रजातियों का समृद्ध प्राकृतिक संसार से लबरेज अरुणाचल प्रदेश की पूर्वी हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच प्रकृति…

पूर्वी हिमालय की अनछुई खूबसूरती को मिली वैश्विक पहचान,अरुणाचल प्रदेश का अपना पहला रामसर स्थल
संजय कुमार / अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट के रूप में ग्लॉ झील का चयन, 150 से अधिक वृक्ष और 49 ऑर्किड प्रजातियों का समृद्ध प्राकृतिक संसार से लबरेज अरुणाचल प्रदेश की पूर्वी हिमालयी पर्वत श्रृंखलाओं के बीच प्रकृति की गोद में बसी ग्लॉ झील (Glaw Lake) ने अब वैश्विक पहचान हासिल कर ली है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से 3 अगस्त, 2026 को की थी । घोषणा के अनुसार ग्लॉ झील को भारत की 101वीं रामसर साइट के रूप में नामित किया गया है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश को भी अपना पहला रामसर स्थल मिल गया है।
कमलांग टाइगर रिजर्व एवं वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत स्थित यह निर्मल मीठे पानी की झील पूर्वी हिमालय के समृद्ध और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा है। पहाड़ों से निकलने वाली बारहमासी धाराएं झील को जल प्रदान करती हैं, जबकि चारों ओर फैली घनी हरियाली इसे प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है।
150 से अधिक वृक्ष और 49 ऑर्किड प्रजातियों का घर
ग्लॉ झील का महत्व केवल इसकी प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है। झील और इसके जलग्रहण क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां तथा 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं। यही समृद्ध वनस्पति विविधता इस क्षेत्र को पूर्वी हिमालय के महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट के रूप में स्थापित करती है।
बारहमासी जलधाराओं, घने वनों और विविध वनस्पतियों से घिरी यह आर्द्रभूमि स्थानीय पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे पारिस्थितिक तंत्र जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी अहम योगदान देते हैं।
पहली रामसर साइट से अरुणाचल प्रदेश को मिली नई पहचान
ग्लॉ झील का रामसर स्थल के रूप में नामित होना अरुणाचल प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि है। राज्य को पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि मिली है। इससे न केवल इस क्षेत्र के संरक्षण को नई गति मिलने की उम्मीद है, बल्कि अरुणाचल प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर भी पहचान मिलेगी। रामसर दर्जा किसी आर्द्रभूमि के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करता है। इसके बाद संबंधित क्षेत्र में आर्द्रभूमि संरक्षण, जैव विविधता की सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
महत्वपूर्ण उपलब्धि
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ग्लॉ झील को भारत की 101वीं रामसर साइट और अरुणाचल प्रदेश की पहली रामसर साइट घोषित किए जाने पर इसे जैव विविधता संरक्षण, जल एवं जलवायु सुरक्षा तथा सतत आजीविका की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पूर्वी हिमालय में स्थित यह स्वच्छ मीठे पानी की झील जैव विविधता का प्रमुख केंद्र है। मंत्री के अनुसार झील और इसके कैचमेंट क्षेत्र में 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियां और 49 ऑर्किड प्रजातियां पाई जाती हैं। भूपेंद्र यादव ने भारत के रामसर नेटवर्क के विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 2014 में 26 रामसर स्थलों से बढ़कर भारत में अब 101 रामसर स्थल हो गए हैं। उनके अनुसार यह यात्रा पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के लिए भी उम्मीद
किसी आर्द्रभूमि को रामसर का दर्जा मिलना केवल संरक्षण की औपचारिक मान्यता नहीं है। इससे उस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को समझने, वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक संसाधनों के टिकाऊ उपयोग की दिशा में योजनाएं विकसित करने का अवसर मिलता है। ग्लॉ झील जैसे संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिक तंत्रों का संरक्षण स्थानीय समुदायों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। जल, वन और जैव विविधता पर निर्भर समुदायों के लिए स्वस्थ आर्द्रभूमियां जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार होती हैं। इसलिए ग्लॉ झील का संरक्षण प्रकृति और मानव समाज—दोनों के हित में महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
रामसर स्थलों का 26 से 101 तक का सफर
भारत ने पिछले एक दशक से अधिक समय में रामसर स्थलों के नेटवर्क का उल्लेखनीय विस्तार किया है। 2014 में देश में 26 रामसर स्थल थे, जबकि ग्लॉ झील के जुड़ने के साथ यह संख्या 101 हो गई है। यह बढ़ती संख्या भारत की विशाल आर्द्रभूमि संपदा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के साथ-साथ उनके संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है। प्रत्येक नई रामसर साइट देश के उन प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की ओर ध्यान आकर्षित करती है, जो जल सुरक्षा, जैव विविधता, जलवायु संतुलन और स्थानीय आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।
अनछुई खूबसूरती से वैश्विक पहचान तक
पूर्वी हिमालय की शांत वादियों में स्थित ग्लॉ झील लंबे समय से प्रकृति की अनमोल धरोहर के रूप में मौजूद रही है। अब रामसर का दर्जा मिलने के बाद इस अनछुई प्राकृतिक सुंदरता को वैश्विक पहचान मिल गई है। ग्लॉ झील का यह सम्मान केवल अरुणाचल प्रदेश की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध आर्द्रभूमि विरासत को संरक्षित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय मान्यता के साथ झील और इसके आसपास के नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण, वैज्ञानिक अध्ययन और सतत प्रबंधन को नई मजबूती मिलेगी। ग्लॉ झील अब केवल पूर्वी हिमालय की एक खूबसूरत झील नहीं, बल्कि भारत की प्राकृतिक विरासत और आर्द्रभूमि संरक्षण की बढ़ती प्रतिबद्धता का एक नया प्रतीक बन गई है।

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विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

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