संजय कुमार / गौरैया पर भारत सहित तीन दर्जन से अधिक देशों ने डाक टिकट जारी कर गौरैया संरक्षण का सन्देश देने का काम किया है। इनमें भारत, इटली, बांग्लादेश, बेलारूस, एल्डर्नी वेस्ट कोस्ट, बहरीन, असेंशियन द्वीप, बोस्ना और, हर्सेगोविना, बेल्जियम, बुल्गारिया, काबो वर्दे, सेंट यूस्टैटियस, कैरेबियन नीदरलैंड, क्यूबा, चेक गणराज्य, डेनमार्क, इस्टोनिया, फ़ोरयार (फ़ैरो द्वीप), फ्रांस, ग्वेर्नसे, इराक, आइल ऑफ़ मैन, जर्सी, कजाकिस्तान, लाइबेरिया गणराज्य, लक्ज़मबर्ग, मलावी, मालदीव, माली गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, नीदरलैंड, पोलैंड गणराज्य, सान मारिनो, सर्बिया, सिएरा लियोन, स्पेन, युगांडा और यूगोस्लाविया ने गौरैया पर डाक टिकट जारी किये हैं। जबसे गौरैया विलुप्ति की ओर अग्रसर हुई है और पक्षी प्रेमी, वैज्ञानिकों एंव सरंक्षणविदों का ध्यान गौरैया की तरफ़ गया है। इसमें विश्व के कई देशों ने गौरैया संरक्षण को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए डाक टिकट जारी कर महत्वपूर्ण सन्देश देने का काम किया है।
भारत में 9 जुलाई 2010 को विलुप्त होती गौरैया को संरक्षण देने और लोगों में जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए डाक टिकट जारी किया था। इसकी कीमत पांच रूपये हैं। यह डाक टिकट दो पक्षियों ‘गौरैया और रॉक कबूतर’ के सेट में जारी किया गया हैं। इस डाक टिकट का उद्देश्य लोगों को गौरैया के संरक्षण से जोड़ना है। सन्देश को व्यापक बनाने के लिए विषयवस्तु का पूरा ख्याल रखा गया है। टिकट प्रस्तुति के पृष्टभूमि पर खपरैल का घर है। ऊपर कबूतर वाला टिकट है, नीचे गौरैया वाली। टिकट गौरैया पर फोकस है। बंद और खुली खिड़की, आंगन में पानी का बर्तन, बिखरा हुआ आनाज, गौरैया की पसंदीदा बोगनवेलिया का पेड़, घर के खोह में घोंसला और उसमें गौरैया के अंडे। टिकट में नर मादा गौरैया को पानी के बर्तन पर बैठा दिखाया गया है। टिकट की प्रस्तुति को गौरैया के संरक्षण के ख्याल से संजोया गया है। गौरैया के सामने आहार, पानी और आवसीय संकट को रेखांकित किया गया है। डाक टिकट में एक नर और मादा गौरैया को एक घड़े पर बैठे हुए दर्शाया गया है, साथ ही जमीन पर पानी भरा सकोरा भी रखा है जो गौरैया के लिए पानी रखने का संकेत देता है। गौरैया के सामने आहार संकट को दूर करने के लिए अनाज भी रखने का सन्देश दिया गया है। टिकट प्रस्तुति पर जमीन पर अनाज डाला हुआ है और गौरैया जोड़ा दाना चुग रहा है। तीसरा दृश्य अहम् है। इसमें आवासीय संकट को दिखाया गया है। गौरैया इन्सान के घर के अंदर-बाहर खिड़की, रौशनदान, फूस एवं खपरैल आदि से प्रवेश कर जहाँ जगह मिलता है वहीँ तिनका रख कर घोंसला बना लेती है। लेकिन बदलते परिवेश में हमने फूस एवं खपरैल घर की जगह कंक्रीट को अपना लिया खिड़की/ रौशनदान को बंद कर दिया। घरों में गौरैया के प्रवेश पर रोक लग गयी। गौरैया के सामने आवासीय संकट खड़ा हो गया। डाक टिकट की प्रस्तुति पर घर की बंद और खुली खिड़की के जरिये बताया गया है कि हम इन्सान ने घरों में रहने वाली गौरैया के लिए खिड़की दरवाजा को बंद कर दिया है उसे खोलना होगा। दीवार के खोह में गौरैया का घोंसला अंड्डे के साथ दिखाया गया है। गौरैया हमेशा घर में नहीं रहती वह पेड़ पौधों खासकर बबूल, नीबू, समी, बोगनवेलिया आदि जिसमें कांटे एवं झाडीनुमा हो उस पर बैठती है। डाक टिकट की प्रस्तुति पर बोगनवेलिया का पेड़ है। कहा जा सकता है कि पूरी तरह से गौरैया संरक्षण को समर्पित है
भारत ने अपने टिकट पर गौरैया संरक्षण की पूरी तस्वीर पेश की है, लेकिन विश्व के दूसरे देशों द्वारा गौरैया संरक्षण पर डाक टिकटों पर विस्तृत विवरण नहीं है, सिर्फ एक या जोड़ा गौरैया की तस्वीर है, जो गौरैया की याद दिलाते हैं। कई पर हाउस स्पैरो पैसेर डोमेस्टिकस लिखा है। टिकट पर मूल्य भी अंकित है। ज्यादतर देशीं ने नर गौरैया को जगह दी है।
बात करें बंगला देश द्वारा जारी गौरैया डाक टिकट की, तो टिकट पर नर और मादा हाउस स्पैरो की तस्वीर है, जो झाडीनुमा पेड़ पर बैठी हैं। टिकट पर हाउस स्पैरो पैसेर डोमेस्टिकस लिखा है जो बताता है कि गौरैया पक्षी पैसर वंश की है, जो एक जीववैज्ञानिक जाति है। वहीँ, बेलारूस ने 2003 में जोड़ा गौरैया की टिकट जारी की है, जो एक टहनी पर बैठे हैं। टिकट पर एक ओर बर्ड्स लाइफ और दूसरी ओर पैसेर डोमेस्टिकस यानि गौरैया के वंश की जानकारी है। बहरीन ने दाना चुगते जोड़ा गौरैया को टिकट पर जगह दिया है। काबो वर्दे ने भी जोड़ा गौरैया पर टिकट जारी किया है। इराक, आइल ऑफ़ मैन, सेंट यूस्टैटियस, चेक गणराज्य (2002 में जारी ), फ़ोरयार (फ़ैरो द्वीप 1999 में जारी) इस्टोनिया, कजाकिस्तान (2011 में जारी) के टिकट पर जोड़ा गौरैया है, जो पेड़ की टहनी पर बैठी हैं। डेनमार्क ने 1994 में जारी टिकट में जोड़ा गौरैया को दाना चुगते दिखाया है।
लक्ज़मबर्ग द्वारा 2020 में जारी टिकट पर एक नर गौरैया को गमले के स्टैंड पर बैठा दिखाया गया है। मालदीव ने दो टिकट जारी किया है। एक में एक नर उड़ रहा है। दूसरे में जोड़ा गौरैया बैठी है। यह टिकट 2014 में जारी किया गया है। मोल्दोवा गणराज्य ने 2010 में को टिकट जारी किया है, एक में जोड़ा गौरैया पेड़ पर बैठी है जबकि दूसरे में एक नर गुलदस्ते के पास बैठा है। सान मारिनो द्वारा 2002 जारी टिकट के ऊपर एक व्यक्ति के हथेली पर दो नर गौरैया को दाना चुगते और एक को उड़ते दिखाया गया है। सर्बिया ने 2010 में जारी टिकट पर पेड़ पर बैठे एक नर गौरैया को कंक्रीट के जंगल को निहारते दिखाया है। वहीँ, असेंशियन द्वीप ने डाक टिकट पर तीन बच्चा गौरैया के द्वारा दाना मांगते और चोंच में दाना लिए नर गौरैया (पिता) को दिखाया है। सिएरा लियोन के टिकट पर उड़ते हुए नर गौरैया है। स्पेन द्वारा 2006 में जारी टिकट पर फूल पर बैठे एक नर गौरैया की तस्वीर है। इटली द्वारा जारी डाक टिकट पर एक पीले रंग के फूलों से लदी टहनी पर एक गौरैया बैठी है। गौरैया को पीले रंग के फूल बहुत पसंद हैं। एल्डर्नी वेस्ट कोस्ट ने हरियाली के बीच पंख फैलाये उड़ते हुए नर गौरैया को टिकट पर जगह दिया है। साथ ही टिकट पर हॉउस स्पैरो पैसेर डोमेस्टिकस भी लिखा हुआ है। बोस्ना आई हर्सेगोविना झाड़ी पर बैठे नर गौरैया को जगह दिया है। बेल्जियम ने भी टिकट पर नर गौरैया को जगह दिया है। क्यूबा (2010 में जारी), बुल्गारिया, कैरेबियन नीदरलैंड, लाइबेरिया गणराज्य, माली गणराज्य, फ्रांस (2018 में जारी), पोलैंड गणराज्य 2022 में जारी) के टिकट पर एक नर गौरैया टहनी पर बैठा है। ग्वेर्नसे के टिकट पर एक नर गौरैया एक मकान पर बैठा है। जर्सी द्वारा जारी टिकट पर फूल के पेड़ पर एक नर गौरैया बैठा है। युगांडा 1998 पेड़ पर बैठे नर गौरैया की आवाज लगाने के दौरान जीभ निकाले तस्वीर है। 2019 में नीदरलैंड और यूगोस्लाविया ने एक मादा गौरैया की तस्वीर को जगह दी है। देखा जाये तो विलुप्त होती गौरैया के संरक्षण की आवाज को 20 मार्च 2010 में ‘विश्व गौरैया दिवस’ की घोषणा के साथ ही बल मिला था। जबकि दुनिया भर के कई देशों ने गौरैया पर डाक टिकट 20 मार्च 2010 के पहले और बाद में जारी किये हैं। बड़े पैमाने पर गौरैया को दुनिया के देशों द्वारा जगह देना इंगित करता है कि विलुप्ति की ओर अग्रसित गौरैया को बचने को लेकर पूरा विश्व चिंतित और प्रयासरत है।
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