कावर झील की बिगड़ती स्थिति पर केंद्र-राज्य को एनजीटी का नोटिस

नई दिल्ली। 26 जुलाई 2026/ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बिहार में एशिया की सबसे बड़ी ऑक्सबो झील कही जाने वाली कावर झील की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनजीटी ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की।एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश…

नई दिल्ली। 26 जुलाई 2026/ राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बिहार में एशिया की सबसे बड़ी ऑक्सबो झील कही जाने वाली कावर झील की बिगड़ती पर्यावरणीय स्थिति पर केंद्र सरकार और अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। एनजीटी ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए यह कार्रवाई की।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि बेगूसराय से करीब 20 किलोमीटर दूर चेरीया बरियारपुर स्थित कावर झील को वर्ष 2020 में रामसर साइट का दर्जा मिला था। यह पर्यावरणीय रूप से बेहद महत्वपूर्ण है और यह स्थानीय मछुआरा समुदाय की आजीविका का प्रमुख स्रोत रही है।
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार झील में पानी कम होने और पारिस्थितिक क्षरण के कारण मछलियों की संख्या और जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। कई स्थानीय मछली प्रजातियां खत्म होने की कगार पर हैं या कुछ हिस्सों से पूरीतरह गायब हो चुकी हैं। पीठ ने यह भी नोट किया कि पहले लगभग 63 वर्ग किलोमीटर में फैली यह झील अब जल स्तर घटने और अतिक्रमण के कारण कई छोटे-छोटे हिस्सों में बंटती जा रही है। यह झील बूढ़ी गंडक नदी के घुमाव से बनी एक अनोखी ऑक्सबो वेटलैंड है, जिसका संरक्षण बेहद जरूरी है।

कावर झील : पक्षी देखने वालों के लिए स्वर्ग के समान एक जगह,प्राकृतिक आर्द्रभूमि

कावर झील गंडक, बिया और कराह नदी के संगम से पानी खींचती है – बिहार के जिला मुख्यालय बेगूसराय से 22 किमी उत्तर-पश्चिम में मांझौल के पास स्थित है। झील के चारों ओर बहुत सारी जलीय वनस्पति के साथ आसपास के वृक्ष सर्दियों के मौसम के दौरान हजारों पक्षियों को आकर्षित करते हैं। एशिया की सबसे बड़ी ताजे पानी की ऑक्सबो (oxbow) झील, सर्दियों के दौरान प्रवासी प्रजातियों के साथ पक्षी देखने वालों के लिए एक स्वर्ग। यह एक जैव विविधता हॉटस्पॉट और इको-टूरिज्म के लिए एक लोकप्रिय स्थान के रूप में कार्य करता है।

काबर झील[ अथवा कावर झील जिसे स्थानीय रूप से काबर ताल, कनवार ताल या कावर ताल भी कहते हैं। बिहार के राजधानी पटना से 100 किलोमीटर पूरब में स्थित है। इस झील और आसपास की नमभूमि (वेटलैंड) को पक्षी विहार का दर्जा प्राप्त है। बिहार सरकार  के वन विभाग के आँकड़ों के मुताबिक़ इसे पक्षी विहार का दर्जा 1989 में दिया गया और यह कुल 63.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर विस्तार लिए हुए है। यहाँ जाड़ों में काफी प्रवासी पक्षी आते हैं जिनमें विदेशी पक्षी भी शामिल हैं, हालाँकि, हाल के समय में यह झील पानी की कमी से जूझ रही है और सरकारी योजनाओं के पारित होने के बावज़ूद उपेक्षा के चलते संकटपूर्ण स्थिति में है। झील पर निर्भर स्थानीय मछुआरे (मल्लाह) भी इसके कारण संकट झेल रहे हैं। झील के नजदीक ही जय मंगल गढ़ के नाम से एक प्रसिद्ध एक मंदिर भी है जिसे पाल वंश के काल में स्थापित माना जाता है और यह भी अनुमान है कि यह एक किले के रूप में था। (फोटो साभार -पर्यटन विभाग,बिहार सरकार )

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 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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