“हरित बिहार, स्वच्छ बिहार” के संकल्प को साकार करने का आह्वान

विश्व पर्यावरण दिवस पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग-सह-युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया पौधारोपणपटना, 05 जून 2026: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग-सह-युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, बिहार सरकार के माननीय मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने अपने सरकारी…

विश्व पर्यावरण दिवस पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग-सह-युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया पौधारोपण
पटना, 05 जून 2026: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग-सह-युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग, बिहार सरकार के माननीय मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने अपने सरकारी आवास 41, हार्डिंग रोड, पटना में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास एवं सतत भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
इस अवसर पर आयोजित पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे दायित्वों को स्मरण करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लेने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि आज संपूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, जैव विविधता के क्षरण, वायु एवं जल प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हमारी अनिवार्य जिम्मेदारी बन चुकी है।
मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे न केवल हमें प्राणवायु प्रदान करते हैं, बल्कि वर्षा चक्र को संतुलित रखने, भूजल संरक्षण, भूमि कटाव रोकने, जैव विविधता को संरक्षित करने तथा वातावरण को शुद्ध बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना मात्र पर्यावरणीय कार्य नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य में किया गया एक अमूल्य निवेश है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि बिहार की युवा शक्ति सामाजिक परिवर्तन की सबसे बड़ी वाहक है। यदि राज्य का प्रत्येक युवा वर्ष में कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में बिहार का पर्यावरणीय परिदृश्य उल्लेखनीय रूप से बदल सकता है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाने में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा प्रारंभ किए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान ने वृक्षारोपण को भावनात्मक और सामाजिक चेतना से जोड़ने का कार्य किया है। यह अभियान न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है, बल्कि मातृत्व, संवेदनशीलता और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना को भी सुदृढ़ करता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस अभियान से जुड़कर अधिकाधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के लिए अनेक योजनाओं एवं कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। राज्य में हरित आवरण बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने तथा सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही इस दिशा में सार्थक परिवर्तन संभव है।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस का संदेश तभी सार्थक होगा जब हम इसे केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, स्वच्छता, वृक्षारोपण तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग जैसी आदतों को अपनाकर हम पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भी पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा हरित बिहार के निर्माण के लिए सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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