दुनिया के 80 फीसदी धरोहर स्थलों को जलवायु परिवर्तन से खतरा

संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी। अभी तक युद्ध को राष्ट्रीय धरोहरों के लिए बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता था। लेकिन एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया कि बढ़ता पारा दुनिया की प्रतिष्ठित ऐतिहासिक विरासतों को नष्ट कर रहा है। दुनिया की 80 फीसदी धरोहर जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना कर रही है। यूनेस्को,…

संयुक्त राष्ट्र, एजेंसी। अभी तक युद्ध को राष्ट्रीय धरोहरों के लिए बड़े खतरे के तौर पर देखा जाता था। लेकिन एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया कि बढ़ता पारा दुनिया की प्रतिष्ठित ऐतिहासिक विरासतों को नष्ट कर रहा है।

दुनिया की 80 फीसदी धरोहर जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना कर रही है। यूनेस्को, आईयूसीएन और यूनियन ऑफ कंसर्ड साइंटिस्ट्स के शोधकर्ताओं ने रिपोर्ट जारी की है। इसमें दुनिया के करीब 1,172 स्थलों का अध्ययन किया गया। ये तेज गर्मी, तूफानों और सूखे से खराब हो रहे हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित

यह दक्षिणी इराक के प्राचीन शहर

उर में स्थित 4000 साल पुराना पिरामिड नुमा मंदिर है। चंद्रमा के देवता नन्ना को समर्पित मंदिर धूल और तेज हवाओं के कारण ढह रहा है। भीषण गर्मी और सूखे के कारण भूजल खारा हो गया है। नमक परत गला रहा है।

इस्फहान की मस्जिदें, ईरान ईरान की मस्जिद-ए-जामे को ईरानी वास्तुकला का संग्रहालय कहा जाता है। नक्श-ए-जहान स्क्वायर पर स्थित ये मस्जिद 2012 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा बना। यहां भूजल के अत्यधिक दोहन और सूखे के कारण जमीन धंस रही है3 विली के ईस्टर द्वीप पर स्थित मोआई मूर्तियों को 1995 में विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया। 800 वर्ष पुरानी 15 प्रतिमाएं स्थापित है। जलवायु परिवर्तन से जुड़े समुद्र स्तर में वृद्धि के कारण गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थल को भारी नुकसान पहुंच सकता है।

चीन की विशाल दीवार

1987 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। चीन की उत्तरी सीमा पर 21 हजार किलोमीटर लंबी यह दीवार अब जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से लुप्त हो रही है। भारी बारिश, तेज हवाओं और मिट्टी में बढ़ते नमक के कारण दीवार टूट रही है। दीवार का 52 फीसदी हिस्सा या तो गायब हो चुका है या बहुत खराब स्थिति में है।

देश में भी इन स्थलों पर असर

ताजमहल (आगरा)

बढ़ते प्रदूषण और जलवायु कारकों के कारण होने वाली एसिड रैन (अम्लीय वर्षा) संगमरमर की सतह को धीरे-धीरे घुला रही है। रिपोर्ट के अनुसार, ताज के पत्थरों को केमिकल वेदरिंग से बचाने के लिए विशेष वैज्ञानिक उपचार किए जा रहे हैं।

धोलावीरा और पुरी

गुजरात का प्राचीन बंदरगाह शहर घोलावीरा और ओडिशा के तटीय मंदिर पुरी समुद्र के बढ़ते जलस्तर और चक्रवातों की बढ़ती तीव्रता के कारण खतरे में हैं।

जैसलमेर का किला (राजस्थान)

बढ़ते तापमान और फ्लैश फ्लड्स से किले की नींव कमजोर हो रही है। यहां नमक का जमाव एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है।

अजंता-एलोरा की गुफाएं (महाराष्ट्र)

बदलती मानसून प्रणालियों के कारण बढ़ी हुई नमी गुफाओं के भीतर फंगस की वृद्धि को बढ़ा रही है, जिससे वहां के प्राचीन भित्ति चित्र खराब हो रहे हैं

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(साभार दैनिक हिंदुस्तान नई दिल्ली ,18-04 -2026 )

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 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

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*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

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