इस रक्षाबंधन एक राखी गौरैया के नाम

“इस , एक राखी गौरैया के नाम”“एक राखी नन्ही गौरैया के नाम बाँधे”गौरैया तो हमारी सबसे पुरानी साथी/बहन है – आंगन में चहकती थी, आँगन-रसोई प्रवेश कर दाना चुगती थी, और बिना कुछ मांगे पूरे घर की रक्षा करती थी – कीड़ों से।हमने उसे भुला दिया, पर इस राखी उसे फिर याद कर लेते हैं।तो…

“इस , एक राखी गौरैया के नाम”
“एक राखी नन्ही गौरैया के नाम बाँधे”
गौरैया तो हमारी सबसे पुरानी साथी/बहन है – आंगन में चहकती थी, आँगन-रसोई प्रवेश कर दाना चुगती थी, और बिना कुछ मांगे पूरे घर की रक्षा करती थी – कीड़ों से।
हमने उसे भुला दिया, पर इस राखी उसे फिर याद कर लेते हैं।तो आइये
“गौरैया को भी राखी बांधे” अभियान
राखी कैसे बांधें? गौरैया को पकड़ना नहीं है, उसके घर को राखी बांधनी है –
घोंसले को राखी बांधें
एक छोटी सी राखी अपने लकड़ी / मिट्टी / गत्ते वाले कृत्रिम घोंसले पर बांध दें। और कहें – “गौरैया , तू यहां सुरक्षित है, ये घर तेरा है।”
पेड़ को राखी बांधें
जिस पेड़ पर गौरैया आती है – नीम, तुलसी, अमरूद, गेंदा – उस पर राखी बांधें। पेड़ रहेगा तो गौरैया रहेगी।
दाना-पानी के बर्तन को राखी बांधें
उसके दाना-पानी के सकोरे पर राखी। ये वचन कि रोज दाना-पानी दूंगा।
*एक छोटा सा संकल्प-पत्र

प्यारी गौरैया
आज से मैं वचन देता/देती हूँ
तेरे घोंसले की रक्षा करूँगा,
दाना-पानी रखूँगा हमेशा,
प्लास्टिक नहीं, सिर्फ देसी घर दूँगा,
तू फिर से मेरे आंगन में लौट आ,
तुम्हारा बचपन का साथी

#GauraiaKoRakhi #EkRakhiGauraiaKeNaam

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन