
“इस , एक राखी गौरैया के नाम”
“एक राखी नन्ही गौरैया के नाम बाँधे”
गौरैया तो हमारी सबसे पुरानी साथी/बहन है – आंगन में चहकती थी, आँगन-रसोई प्रवेश कर दाना चुगती थी, और बिना कुछ मांगे पूरे घर की रक्षा करती थी – कीड़ों से।
हमने उसे भुला दिया, पर इस राखी उसे फिर याद कर लेते हैं।तो आइये
“गौरैया को भी राखी बांधे” अभियान
राखी कैसे बांधें? गौरैया को पकड़ना नहीं है, उसके घर को राखी बांधनी है –
घोंसले को राखी बांधें
एक छोटी सी राखी अपने लकड़ी / मिट्टी / गत्ते वाले कृत्रिम घोंसले पर बांध दें। और कहें – “गौरैया , तू यहां सुरक्षित है, ये घर तेरा है।”
पेड़ को राखी बांधें
जिस पेड़ पर गौरैया आती है – नीम, तुलसी, अमरूद, गेंदा – उस पर राखी बांधें। पेड़ रहेगा तो गौरैया रहेगी।
दाना-पानी के बर्तन को राखी बांधें
उसके दाना-पानी के सकोरे पर राखी। ये वचन कि रोज दाना-पानी दूंगा।
*एक छोटा सा संकल्प-पत्र
प्यारी गौरैया
आज से मैं वचन देता/देती हूँ
तेरे घोंसले की रक्षा करूँगा,
दाना-पानी रखूँगा हमेशा,
प्लास्टिक नहीं, सिर्फ देसी घर दूँगा,
तू फिर से मेरे आंगन में लौट आ,
तुम्हारा बचपन का साथी
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