गौरैया अपने स्वास्थ्य का खुद रखती है ख्याल

संजय कुमार / गौरैया अपने स्वास्थ्य का खुद ख्याल रखती है। फूल और पत्ते का सेवन कर अपने को स्वस्थ रखती है। गेंदा, तुलसी, नीम के कोमल पत्तों को भी खाती है,जो औषधि के तौर पर जाने जाते हैं।कह सकते हैं, गौरैया अपनी डॉक्टर खुद है। शहरों में पालतू पशुओं के पशु अस्पताल हैं। जहाँ…

संजय कुमार / गौरैया अपने स्वास्थ्य का खुद ख्याल रखती है। फूल और पत्ते का सेवन कर अपने को स्वस्थ रखती है। गेंदा, तुलसी, नीम के कोमल पत्तों को भी खाती है,जो औषधि के तौर पर जाने जाते हैं।कह सकते हैं, गौरैया अपनी डॉक्टर खुद है।

शहरों में पालतू पशुओं के पशु अस्पताल हैं। जहाँ इन्सान द्वारा बीमार/घायल पशु-पक्षियों को इलाज के लिए लाया जाता है, लेकिन आम पशु-पक्षियों को इसका पता नहीं।  नन्ही गौरैया बाग-बगीचा,किचन गार्डन आदि में ही अपना इलाज कर लेती है। गौरैया तुलसी का पत्ता खाती है । ऐसा कर कीड़े-मकोड़े और बैक्टीरिया से तुलसी को बचाती है। और, खुद को स्वस्थ रखती है। तुलसी, सर्दी-खांसी में रामबाण है। गौरैया तुलसी के कोमल पत्ते चुगती है।  

नीम के कोमल पत्ते खाने से पेट के कीड़े मरते हैं और खून साफ होता है। गर्मी में ये बहुत खाती हैं। नीम का फल भी जब पक जाता है तब खाती है।  गेंदागेंदा के फूल और पत्तों में एंटी-फंगल गुण होते हैं। इससे उनके पंखों में फंगस नहीं लगती। रंग भी चमकदार रहता है। धनिया, पुदीना, बथुआ के कोमल पत्ते भी गौरैया चुग लेती है। नेचुरल दवाई वह प्रकृति से खोज लेती हैं। बीमार होने पर खुद जड़ी-बूटी ढूंढ लेती है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन