नई दिल्ली। केंद्र सरकार के ग्रीन इंडिया मिशन (जीआईएम) के तहत देश में क्षरित वन एवं गैर-वन भूमि के पुनर्स्थापन की दिशा में बड़े पैमाने पर काम किया जा रहा है। वर्ष 2015-16 से अब तक 17 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में 1,84,467 हेक्टेयर भूमि पर पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन का कार्य किया गया है। यह मिशन जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) के तहत संचालित नौ प्रमुख मिशनों में शामिल है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सोमवार (10 अगस्त ) को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ग्रीन इंडिया मिशन का उद्देश्य एकीकृत भूदृश्य दृष्टिकोण के माध्यम से क्षरित वन और गैर-वन क्षेत्रों का पुनर्स्थापन करना है।
मध्य प्रदेश में सबसे अधिक क्षेत्र में काम मिशन के तहत सबसे अधिक 32,831 हेक्टेयर भूमि पर पुनर्स्थापन कार्य मध्य प्रदेश में किया गया है। इसके बाद छत्तीसगढ़ में 22,601 हेक्टेयर, ओडिशा में 20,711 हेक्टेयर, मिजोरम में 19,643 हेक्टेयर, मणिपुर में 17,488 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 14,836 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य हुआ है।
केरल में 14,290 हेक्टेयर, पंजाब में 7,168 हेक्टेयर, सिक्किम में 6,567 हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 5,223 हेक्टेयर, अरुणाचल प्रदेश में 5,314 हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 4,202 हेक्टेयर और हरियाणा में 3,755 हेक्टेयर भूमि पर पुनर्स्थापन कार्य किया गया। इसके अलावा कर्नाटक में 2,722, पश्चिम बंगाल में 2,606, जम्मू-कश्मीर में 1,778, आंध्र प्रदेश में 1,433 और हिमाचल प्रदेश में 1,299 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया।
नगर वन और नगर वाटिकाओं पर भी जोर
सरकार शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाने के लिए नगर वन योजना (एनवीवाई) भी लागू कर रही है। इसके तहत वर्ष 2020-21 से 2026-27 के दौरान 600 नगर वन और 400 नगर वाटिकाएं विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के अनुसार, इससे शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ने के साथ वायु गुणवत्ता और स्थानीय मौसम में सुधार में मदद मिलेगी तथा नई पर्यावरणीय परिसंपत्तियां विकसित होंगी।
सात राज्यों को 57.08 करोड़ रुपये आवंटित
ग्रीन इंडिया मिशन के तहत स्वीकृत कार्यों के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक सात राज्यों—छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, मध्य प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम और उत्तर प्रदेश—को कुल 57.08 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं, नगर वन योजना के तहत वृक्षारोपण एवं संबंधित गतिविधियों के लिए राज्यों के स्वीकृत प्रस्तावों के आधार पर राष्ट्रीय प्राधिकरण सीएएमपीए से धनराशि जारी की जाती है।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी
सरकार के अनुसार, ग्रीन इंडिया मिशन के तहत वृक्षारोपण और पौधों की देखभाल का काम स्वीकृत वार्षिक संचालन योजनाओं के अनुसार स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से किया जाता है। इनमें संयुक्त वन प्रबंधन समितियां (जेएफएमसी), ग्राम वन समितियां (वीएफसी) और अन्य समुदाय आधारित संगठन शामिल हैं।
पौधरोपण के बाद पौधों की देखभाल, नर्सरी तैयार करने और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में स्थानीय समुदायों, जेएफएमसी और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाती है।
जियो-टैगिंग और ड्रोन से निगरानी
वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी के लिए केंद्र और राज्यों की कई स्तरों वाली व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत जियो-टैगिंग, जीआईएस आधारित मैपिंग, जियो-टैग की गई तस्वीरों और केएमएल फाइलों का उपयोग किया जा रहा है। राज्य वन विभाग जमीनी जांच और थर्ड पार्टी निगरानी भी कराते हैं। पौधों के जीवित रहने की दर के आधार पर खाली स्थानों पर दोबारा पौधरोपण और रखरखाव जैसे सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं।
जहां राज्यों द्वारा ड्रोन आधारित निगरानी की जाती है, वहां इससे जमीनी निरीक्षण को भी मजबूती मिलती है। इसके अलावा, भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) रिमोट सेंसिंग और जमीनी सत्यापन के जरिए प्रत्येक दो वर्ष में देश के वन क्षेत्र का आकलन करता है। इसके निष्कर्ष इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) में प्रकाशित किए जाते हैं।















