पटना:2-8-2026/ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नितिन नीरा चंद्रा की चंपारण टॉकीज के ‘बेजोड़ टॉक्स, बिहार के जानेमाने हस्ताक्षर और गुमनाम प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दे रहा है। ‘बेजोड़ टॉक्स का 18 वां एपिसोड दो अगस्त को यूट्यूब पर रिलीज किया गया । इस एपिसोड में बिहार की राजकीय पक्षी “गौरैया” के संरक्षण में सक्रिय संजय कुमार पर केंद्रित किया गया है।
क्षेत्रीय सिनेमा और कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली प्रसिद्ध प्रोडक्शन कंपनी ‘चंपारण टॉकीज’ ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘बेजोड़ ओटीटी’ पर एक नए और क्रांतिकारी टॉक शो ‘बेजोड़ टॉक्स’ की शुरुआत की है। इस टॉक शो में बिहार और देश के अन्य हिस्सों से आने वाले उन असाधारण उद्यमियों, नवप्रवर्तकों, पर्यावरणविदों और कलाकारों की प्रेरणादायक कहानियों को दुनिया के सामने ला रहा है, जिन्होंने सीमित संसाधनों में समाज में बड़ा बदलाव किया है।
‘बेजोड़ टॉक्स” के 18वें एपिसोड के अतिथि गौरैया संरक्षक संजय कुमार ने भोजपुरी में गौरैया संरक्षण की हर छोटी-बड़ी बातें बतायी है। कैसे जुड़े और गोरैया संरक्षण की तस्वीर बिहार सहित देश भर में कैसी है को कहानीनुमा अंदाज में बताया।
पूरा एपिसोड सिनेमायी अंदाज़ में प्रस्तुत किया गया है, जो उसकी खूबसूरती है। यह दूसरों से इसलिए अलग है कि ‘बेजोड़ टॉक्स” लोकल बोलियों में अतिथियों से टॉक्स करता है जो जमीनी पुट को लिए रहता है। इसमें सिर्फ टॉक्स ही नहीं है बल्कि संबंधित व्यक्ति के काम को टीम जमीनी खोज कर एपिसोड को जीवंत बनाते हैं। शो के सह-निर्माता ऋषि राज ने गौरैया संरक्षण में किए गए संजय कुमार के कामों का आंकलन दौरा कर किया। टॉक्स के बीच में गौरैया संरक्षण पहल की फुटेज डाल रोचक बनाया हैं। शो की सिनेमैटोग्राफी और शानदार कैमरा वर्क कुंदन आर्य द्वारा किया गया है, जो दर्शकों को एक बेहतरीन विजुअल ट्रीट देता है। मंच की खूबसूरती और थीम आधारित आर्ट वर्क को प्रेमचंद महतो ने जीवंत किया है। वहीं शो की क्रिएटिविटी को चन्द्रा निशा के रचनात्मक इनपुट्स ने और अधिक मजबूती प्रदान की है।
लीक से हटकर काम करने वालों को समर्पित मंच ‘बेजोड़ टॉक्स’ का मुख्य उद्देश्य समाज के उन हीरों को सामने लाना है जो अक्सर मुख्यधारा के मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर जमीनी स्तर पर काम करते हैं। शो में शामिल होने वाले मेहमानों में जैविक खेती करने वाले किसान, जल संरक्षण और पक्षियों के में जुटे पर्यावरणविद, ग्रामीण पृष्ठभूमि के स्टार्टअप संस्थापक और पारंपरिक कला को सहेजने वाले कलाकार शामिल हैं। यह मंच उनकी सफलता के साथ-साथ उनके संघर्ष और विजन की वास्तविक यात्रा को साझा करता है।
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“बेजोड़ टॉक्स” का 18वां एपिसोड बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया संरक्षक संजय कुमार पर
पटना:2-8-2026/ राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नितिन नीरा चंद्रा की चंपारण टॉकीज के ‘बेजोड़ टॉक्स, बिहार के जानेमाने हस्ताक्षर और गुमनाम प्रतिभाओं को वैश्विक मंच दे रहा है। ‘बेजोड़ टॉक्स का 18 वां एपिसोड दो अगस्त को यूट्यूब पर रिलीज किया गया । इस एपिसोड में बिहार की राजकीय पक्षी “गौरैया” के संरक्षण में सक्रिय संजय कुमार…
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संयोजक

हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स
Hamari Gauraiya and Environment Warriors
*सम्पादक -डॉ .लीना
*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य
विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प
20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।
घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।
प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“
हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में
यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।
हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें 📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com
🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।
www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।
सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन
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