सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
पुष्यमित्र / “आप सुंदरता बढ़ाने के नाम पर जलाशयों को पाट नहीं सकते. पानी के तालाबों को न छुएं, उनसे दूर रहें और अपने अधिकारियों से भी कहें कि वे तालाबों को न छुएं।”
यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की है और उन्होंने यह निर्देश दरभंगा के तीन ऐतिहासिक तालाबों गंगासागर, हराही और दिग्घी को लेकर बिहार सरकार द्वारा चलाये जा रहे सौंदर्यीकरण अभियान के संदर्भ में दिया है। सरकार वहां एक सौ करोड़ से अधिक की लागत से इन तालाबों का सौंदर्यीकरण करवा रही थी और इसके लिए वह इस तालाब में मिट्टी डालकर इसे भरवा रही थी. वहां फूड कोर्ट, जिम, पाथ वे और पार्किंग आदि का निर्माण होना था। अदालत ने सरकार से तत्काल काम रोकने कहा है।
दरभंगा शहर के इन तीन ऐतिहासिक तालाबों को जो आपस में एक दूसरे से जुड़े हैं और फिर कमला और बागमती की धाराओं से भी जुड़े हैं, शहर की संस्था तालाब बचाओ अभियान की सक्रियता की वजह से ही बचाया जा सका है। संस्था के वकील ही सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर गये थे।
इससे पहले संस्था सौंदर्यीकरण के नाम पर दरभंगा विवि के भीतर एक तालाब में ईंट लगवाने के मामले को लेकर भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल गई थी। वहां भी उसे सफलता मिला और विवि प्रशासन को ईंट उखड़वाना पड़ा।
मगर दुख की बात है कि इन फैसलों का असर सिर्फ दरभंगा शहर तक ही सीमित है. जबकि एनजीटी औऱ सुप्रीम कोर्ट के फैसलों कों पूरे देश में लागू होना चाहिए. मोतीहारी की मोती झील को सौंदर्यीकरण के नाम पर इसी तरह भरा गया।
अभी देश भर में रिवर फ्रंट के नाम पर नदियों पर इसी तरह के पक्के स्ट्रक्टचर बनाये जा रहे हैं। अहमदाबाद की साबरमती रिवर फ्रंट से शुरू हुआ यह अभियान कोटा से होते हुए पटना और देश के दूसरे शहरों में फैल रहा है। इसके अलावा जितने अमृत सरोवर खुदे हैं, सबमें पक्का स्ट्रक्चर बनाया जा रहा है। जाहिर है, इससे आपकी हमारी आंखें भले तृप्त हो, इन जल संरचनाओं का नुकसान ही होता।(पुष्यमित्र जी के फेसबुक वाल से साभार)













