एनसीएपी के तहत 130 शहरों में स्वच्छ हवा की मुहिम तेज, 11,108 उद्योगों ने अपनाया स्वच्छ ईंधन

नई दिल्ली, 30 जुलाई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत देश के 130 शहरों के लिए शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मिट्टी एवं सड़क की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, कचरा जलाने, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे प्रमुख वायु प्रदूषण स्रोतों…

नई दिल्ली, 30 जुलाई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के तहत देश के 130 शहरों के लिए शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाएं तैयार की गई हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य मिट्टी एवं सड़क की धूल, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन, कचरा जलाने, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने जैसे प्रमुख वायु प्रदूषण स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण करना है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, एनसीएपी के अंतर्गत तैयार राज्य कार्य योजनाओं में औद्योगिक प्रदूषण को कम करने के लिए स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा देने, स्वीकृत ईंधनों के उपयोग को अनिवार्य बनाने, शहर गैस वितरण नेटवर्क विकसित करने तथा उद्योगों एवं व्यावसायिक इकाइयों को सीएनजी, पीएनजी और सीबीजी जैसे स्वच्छ ईंधनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार ने बताया कि औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी और नियमों के अनुपालन की जिम्मेदारी केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों एवं समितियों की है। यह कार्य वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 और जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के तहत सहमति तंत्र के माध्यम से किया जा रहा है।

शहरी स्थानीय निकायों की रिपोर्ट के अनुसार, एनसीएपी से जुड़े शहरों में अब तक 11,108 उद्योगों ने प्राकृतिक गैस, पीएनजी, एलएनजी, एलपीजी और बायोगैस जैसे स्वच्छ ईंधनों को अपनाया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 से 2025-26 के बीच एनसीएपी के तहत 130 शहरों को 16,423.55 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई है। यह राशि 15वें वित्त आयोग के मिलियन-प्लस सिटीज चैलेंज फंड तथा केंद्रीय क्षेत्र की ‘प्रदूषण नियंत्रण’ योजना के माध्यम से दी गई। अब तक शहरों द्वारा 11,575.54 करोड़ रुपये (70.5 प्रतिशत) के उपयोग की सूचना प्राण पोर्टल पर दर्ज की गई है।

कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला एवं शहर स्तर पर जिला कलेक्टर या नगर आयुक्त की अध्यक्षता में निगरानी समितियां नियमित समीक्षा कर रही हैं। वहीं, राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली संचालन समिति तथा पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव की अध्यक्षता में वायु गुणवत्ता निगरानी समिति भी समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करती है। सरकार के अनुसार, एनसीएपी के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। वर्ष 2025-26 में 2017-18 की तुलना में 108 शहरों में वार्षिक पीएम-10 सांद्रता में कमी दर्ज की गई। इनमें 72 शहरों ने 20 प्रतिशत से अधिक और 26 शहरों ने 40 प्रतिशत से अधिक की कमी हासिल की। इसके अलावा, जहां वर्ष 2017-18 में केवल छह शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा कर रहे थे, वहीं वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 14 शहरों तक पहुंच गई।

इसी प्रकार, कैलेंडर वर्ष 2025 में 73 शहरों ने वर्ष 2024 की तुलना में पीएम-2.5 के वार्षिक स्तर में कमी दर्ज की, जिनमें 17 शहरों ने 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट हासिल की। यह जानकारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने गुरुवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।(PIB)

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन