सांसों पर संकट आते ही सख्ती

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।दिल्ली-एनसीआर की हवा दशहरे के अगले दिन बुधवार को खराब श्रेणी में आ गई। इसके साथ ही ग्रुप-1 के प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। इनके तहत बाहरी राज्यों से आने वाली बसों पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही मेट्रो के फेरे भी बढ़ाए गए हैं। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी, बीएस-6 डीजल बसों…

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।
दिल्ली-एनसीआर की हवा दशहरे के अगले दिन बुधवार को खराब श्रेणी में आ गई। इसके साथ ही ग्रुप-1 के प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। इनके तहत बाहरी राज्यों से आने वाली बसों पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही मेट्रो के फेरे भी बढ़ाए गए हैं। केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी, बीएस-6 डीजल बसों को इससे छूट दी गई है। पहले यह प्रतिबंध ग्रैप के दूसरे चरण में लागू होता था।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार, बुधवार दोपहर दो बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक 244 अंक पर पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में भी एक्यूआई के खराब श्रेणी में ही बने रहने के आसार हैं। इसे देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू कर दिया गया है। आयोग ने ग्रैप को संशोधित करते हुए कई प्रावधानों को और सख्त किया है। अब ग्रैप के पहले चरण में ही हरियाणा, यूपी सहित आसपास के राज्यों से आने वाली बसों के दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश पर रोक रहेगी।
मेट्रो 20 अतिरिक्त फेरे लगाएगी
: प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली मेट्रो 22 अक्तूबर से सप्ताह के कामकाजी दिनों में 20 अतिरिक्त फेरे लगाएगी। इससे लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। डीएमआरसी निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों पर धूल कम करने के लिए अभियान भी तेज करेगा। इसकेलिए मेट्रो के इंजीनियर निर्माण स्थलों और आसपास की सड़कों का निरीक्षण करेंगे। डीएमआरसी के मुताबिक, निर्माण स्थलों, स्टेशनों और कार्यालयों में 250 से अधिक एंटी-स्मॉग औरमिस्ट गन लगाई गई हैं। दिल्ली में करीब 31 किलोमीटर लंबी सड़कें फिलहाल मेट्रो निर्माण के लिए निगम के अस्थायी अधिकार क्षेत्र में हैं।


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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

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