कालिख लगे बर्तन को पकड़ने से
तो हाथ भी काले हो जाते हैं। फिर
काले बर्तन क्यों पकड़ते हैं? इस
क्रम में यह कहना सटीक प्रतीत
होता है कि ‘ नमामि गंगा’ अभि-
यान प्रारम्भ करने के समय गंगा
की आरती बड़ी धूमधाम से और
भारी-भरकम से मनाते हैं, जिससे
भारी मात्रा में ‘ध्वनि-प्रदूषण’,वायु
प्रदूषण’ और ‘ अपशिष्ट-प्रदूषण’
उत्पन्न होता है। इन प्रदूषणों से
गंगा के जलीय जीव अक्रान्त हो
जाते हैं और गंगा स्वयं स्वच्छ के
बदले अधिक गंदा हो जाती है।
क्या यह कृत्य शुचिता सम्पन्न है?”
– डॉ.मेहता नगेन्द्र सिंह, पटना। के फेसबुक वॉल से साभार














