लोहे की गौरैया: संरक्षण का संदेश

संजय कुमार / बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया की चहचहाहट पटना के कंकड़बाग के कई इलाकों में सुनाई पड़ती है, फिर भी पहले वाली बात नहीं है। गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित करती खुद गौरैया लोगों के बीच आई है। पटना के कंकड़बाग चौराहे, टैम्पू स्टैंड के पास पिलर पर 2021 से बैठी लोहे की…

संजय कुमार / बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया की चहचहाहट पटना के कंकड़बाग के कई इलाकों में सुनाई पड़ती है, फिर भी पहले वाली बात नहीं है। गौरैया संरक्षण के लिए प्रेरित करती खुद गौरैया लोगों के बीच आई है। पटना के कंकड़बाग चौराहे, टैम्पू स्टैंड के पास पिलर पर 2021 से बैठी लोहे की गौरैया में भले ही जान न हो लेकिन  कबाड़ से बनी लगभग 14 फीट ऊँची  एक कलात्मक संरचना जीवंत लगती है। जैसे  अभी चहक उठी हो। यह जीवंत भले न हो लेकिन  अपने को विलुप्त होने से  बचाने का एक अनोखी पहल, खुद गौरैया के द्वारा है, जो आम लोगों को संदेश देती दिखती है।

लोहे के पुराने सामान, बेकार पड़े स्क्रैप, पानी की टंकी और अन्य अनुपयोगी सामग्री को  पटना आर्ट कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्रों ने दो हफ्ते में कलाकृति तैयार की थी। इसमें शामिल कलाकार अमृत प्रकाश कहते हैं हमने कल्पना और मेहनत से एक विशाल गौरैया का रूप दिया। जिस कबाड़ को लोग बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसी से एक गौरैया ऐसी कलाकृति तैयार हुई जो हजारों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। कई दिनों की मेहनत से कबाड़ से गौरैया की मूर्ति बनायी जो हमें याद दिलाती है,कभी  गौरैया हमारे घरों की मुंडेर, खिड़की और आंगन में चहकती फुदकती और अपना घोंसला बनाती थी।

पटना नगर निगम द्वारा कंकड़बाग चौराहे पर स्थापित गौरैया की कलाकृति पर्यावरण और वन्य जीव संरक्षण  से जोड़ते हुए लोगों को यह संदेश देती है कि बिहार की राजकीय पक्षी गौरैया को  बचाने के लिए भी जगह बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन