भू-दृश्य बदलते बदलती है वन्यजीवन की दुनिया

हिमालय की ऊँचाइयों से लेकर हमारे तटीय जल तक, भू-दृश्य बदलते हैं और उनके साथ बदलती है वन्यजीवन की दुनिया। इस Wildlife Week, उन अनगिनत प्राकृतिक संसारों का जश्न मनाएँ जो भारत को इतना खास बनाते हैं। भारत की विविध भौगोलिक संरचना के कारण यहाँ का वन्यजीवन दुनिया के सबसे समृद्ध और अनोखे पारिस्थितिकी तंत्रों…

हिमालय की ऊँचाइयों से लेकर हमारे तटीय जल तक, भू-दृश्य बदलते हैं और उनके साथ बदलती है वन्यजीवन की दुनिया।

इस Wildlife Week, उन अनगिनत प्राकृतिक संसारों का जश्न मनाएँ जो भारत को इतना खास बनाते हैं। भारत की विविध भौगोलिक संरचना के कारण यहाँ का वन्यजीवन दुनिया के सबसे समृद्ध और अनोखे पारिस्थितिकी तंत्रों (ecosystems) में से एक है। हिमालय की बर्फीली ऊँचाइयों से लेकर देश के विशाल तटीय जल और समुद्री क्षेत्रों तक वन्यजीवों की एक विस्तृत श्रृंखला पाई जाती है।

1. हिमालय का पर्वतीय क्षेत्र (The Himalayan High Altitude)

नीचे इस विविधता का विस्तृत विवरण दिया गया है:

जैसे-जैसे हिमालय में ऊँचाई बढ़ती है, तापमान और वनस्पति में भारी बदलाव आता है। यहाँ के वन्यजीव अत्यधिक ठंड और कम ऑक्सीजन में जीवित रहने के लिए अनुकूलित हैं।

  • मुख्य वन्यजीव: हिम तेंदुआ (Snow Leopard), तिब्बती भेड़िया, कस्तूरी मृग (Musk Deer), हिमालयन तहर, और आईबेक्स (Ibex)।
  • विशेषता: हिम तेंदुआ यहाँ का सबसे प्रमुख शिकारी है, जिसे “पहाड़ों का भूत” भी कहा जाता है। ऊँचाई पर पाए जाने वाले पक्षी जैसे हिमालयन मोनोल भी यहाँ की विशेषता हैं।

2. गंगा और ब्रह्मपुत्र के मैदानी भाग (The Indo-Gangetic Plains)

पहाड़ों से नीचे उतरने पर उपजाऊ मैदानी इलाके और दलदली क्षेत्र शुरू होते हैं, जहाँ घने जंगल और घास के मैदान हैं।

  • मुख्य वन्यजीव: एक सींग वाला गैंडा (Greater One-horned Rhino), एशियाई हाथी, दलदली हिरण (बारासिंघा), और बंगाल टाइगर।
  • विशेषता: असम का काजीरंगा और मानस राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडे और हाथियों के सबसे बड़े आवास हैं।

3. मध्य भारत और दक्कन का पठार (Central India and Deccan Plateau)

यह क्षेत्र शुष्क पर्णपाती जंगलों (Dry Deciduous Forests) और खुले घास के मैदानों से ढका है, जो भारत के सबसे प्रसिद्ध मांसाहारी और शाकाहारी जीवों का घर है।

  • मुख्य वन्यजीव: रॉयल बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ, सुस्त भालू (Sloth Bear), गौर (भारतीय बाईसन), चीतल, और सांभर हिरण।
  • विशेषता: मध्य प्रदेश के कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच जैसे जंगल बाघों के संरक्षण के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।

4. पश्चिमी घाट (The Western Ghats)

यह यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल और एक प्रमुख ‘बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट’ है। यहाँ साल भर भारी वर्षा होती है, जिससे सदाबहार वर्षावन (Rainforests) बनते हैं।

  • मुख्य वन्यजीव: शेर जैसी पूंछ वाला मकाक (Lion-tailed Macaque), नीलगिरि तहर, मालाबार विशाल गिलहरी, और विभिन्न प्रकार के दुर्लभ उभयचर (Amphibians) व सांप।
  • विशेषता: यहाँ पाई जाने वाली कई प्रजातियाँ स्थानिक (Endemic) हैं, यानी वे दुनिया में और कहीं नहीं पाई जातीं।

5. मरुस्थलीय क्षेत्र (The Thar Desert)

पश्चिम में राजस्थान का थार मरुस्थल अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी के लिए जाना जाता है। यहाँ का वन्यजीवन रेतीले वातावरण के अनुकूल है।

  • मुख्य वन्यजीव: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (एक अत्यधिक लुप्तप्राय पक्षी), मरुस्थलीय लोमड़ी, चिंकारा, और ब्लैकबक (काला हिरण)।

6. तटीय और समुद्री जल (Coastal and Marine Ecosystem)

भारत की लगभग 7,516 किलोमीटर लंबी तटरेखा, जिसमें सुंदरबन के मैंग्रोव, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के द्वीप समूह शामिल हैं, जलीय जीवन से समृद्ध है।

  • मैंग्रोव क्षेत्र (सुंदरबन): यह खारे पानी के मगरमच्छों और तैरने वाले रॉयल बंगाल टाइगर्स का अनोखा आवास है।
  • समुद्री जल और कोरल रीफ: यहाँ ड्युगोंग (Sea Cow), विभिन्न प्रकार की डॉल्फ़िन (जैसे गंगा डॉल्फ़िन और इरावदी डॉल्फ़िन), ओलिव रिडले कछुए, व्हेल शार्क और रंग-बिरंगी कोरल रीफ मछलियाँ पाई जाती हैं।
  • विशेषता: ओडिशा का गहिरमाथा तट ओलिव रिडले कछुओं के सामूहिक घोंसले (Arribada) के लिए दुनिया का सबसे बड़ा स्थल है।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।“

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