संजय कुमार/ भारत के बर्डमैन डॉ. सालिम अली की आत्मकथा ‘The Fall of a Sparrow’ (1985) में एक घटना वर्णित है, जो आज भी मौजू है, जो लोग आज भी गौरैया का शिकार करते हैं। 10 साल के सालिम ने अपनी एयरगन से गौरैया का शिकार 1906-07 में किया था। शिकार के बाद उन्होंने अपनी डायरी में नोट लिखा था –“एक नर गौरैया छेद के पास लगी कील पर बैठी थी, जबकि मादा अंदर अंडों पर बैठी थी। मैंने अस्तबल में खड़ी एक गाड़ी के पीछे छिपकर उन पर हमला किया और नर को गोली मार दी। बहुत कम समय में मादा को एक और नर मिल गया, जो बाहर कील पर ‘पहरेदार’ की तरह बैठ गया। मैंने इस नर को भी गोली मार दी, और फिर कुछ ही देर में मादा के साथ एक और नर तैयार दिखा, जिसने तुरंत ही मरे हुए साथी की जगह ले ली।” (“A cock sparrow perched on the nail near the entrance to the hole while the female sat inside on the eggs. I ambushed them from behind a stabled carriage and shot the male. In a very short while the female acquired another male who also sat “on guard” on the nail outside. I shot this male also, and again in no time the female seemed to have another male in waiting who immediately stepped into the gap of the deceased husband”. This is a note written by India’s legendary birdman Salim Ali in 1906-07 when he was a 10-year-old boy.)

कई साल बाद सलीम अली ने अपनी आत्मकथा ‘द फ़ॉल ऑफ़ ए स्पैरो’ (The Fall of a Sparrow) में लिखा, “मुझे इस नोट पर काफ़ी गर्व है, क्योंकि भले ही इसे एक शिकारी के तौर पर अपनी काबिलियत के रिकॉर्ड के तौर पर लिखा गया था और तब मुझे इसके किसी संभावित महत्व का अंदाज़ा भी नहीं था, लेकिन आज के व्यवहार संबंधी अध्ययनों की रोशनी में यह ज़्यादा अर्थपूर्ण साबित हुआ है।”
“जब मादा गौरैया अंदर सुराख़ में घोंसले के अंदर बैठी थी तब एक नर गौरैया सुराग के पास कील पर पहरेदार की तरह बैठा था। मैंने अस्तबल में खड़ी गाड़ी के पीछे से उसे मारा। थोड़ी देर में उस मादा ने एक अन्य नर को बुला लिया और वो फिर पहरे पर बैठ गया। मैंने उसे भी मार दिया। अगले सात दिनों में मैंने उस स्थान पर आठ नर गौरैयों को मार गिराया, और प्रत्येक बार उस मादा को एक नया नर मिल जाता। मानो नर गौरैया उसके लिए हमेशा तैयार रहते थे। “इस घटना सबक मिलता हैं- नर पहरेदार होता है: खतरे को भाप की चीं-चीं कर मादा को सतर्क करता है। सालिम अली बाद में लिखते हैं – “मुझे इस नोट पर गर्व है क्योंकि हालांकि इसका मकसद एक शिकारी के तौर पर मेरी काबिलियत का रिकॉर्ड बनाना था… लेकिन आजकल के बिहेवियरल स्टडीज़ की रोशनी में यह ज़्यादा मतलब वाला साबित हुआ है”- (“I am rather proud of this note because though intended as a record of my prowess as a hunter… it has proved more meaningful in the light of present-day behavioral studies”)- यानी एक मादा के आस-पास कई अविवाहित नर हमेशा तैयार रहते हैं। अगर एक मर जाए तो दूसरा तुरंत उसकी जगह ले लेता है। यह घटना यह बताता है कि झुण्ड में रहने वाली गौरैया का परिवार सिर्फ दो पक्षियों का नहीं, पूरे मोहल्ले का समाज है।
सालिम अली की शिकारी से संरक्षक बनने की कहानी यही से शुरू होती है। 8 गौरैया और पीली गले वाली गौरैया को मारने का अपराधबोध और जिज्ञासा सालिम को बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ले गई, जहाँ डब्लू सी मिलार्ड ने उन्हें पीली गले वाली गौरैया (Yellow-throated Sparrow) के बारे में बताया जिसका सालिम अली ने शिकार किया था।
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