सूरत के उधना स्टेशन है “स्पैरो जोन”

संजय कुमार/ घर-आंगन की प्यारी सी नन्ही जान गौरैया को संरक्षित करने की दिशा में रेलवे ने ‘स्पैरो जोन’ बना कर मिसाल कायम किया है। गुजरात के सूरत का उधना स्टेशन को स्पैरो जोन (गौरैया का इलाका) बना कर गौरैया संरक्षण का अलख रेलवे जगा रहा है। यहाँ स्पैरो ज़ोन का बोर्ड लगा है जिस…

संजय कुमार/ घर-आंगन की प्यारी सी नन्ही जान गौरैया को संरक्षित करने की दिशा में रेलवे ने ‘स्पैरो जोन’ बना कर मिसाल कायम किया है। गुजरात के सूरत का उधना स्टेशन को स्पैरो जोन (गौरैया का इलाका) बना कर गौरैया संरक्षण का अलख रेलवे जगा रहा है। यहाँ स्पैरो ज़ोन का बोर्ड लगा है जिस पर झुंड में गौरैया की तस्वीर है। साथ ही शेड पर गौरैया के कटाउट भी लगे हैं।

यहाँ गौरैया को पर्यावरण अनुकूल अधिवास दिया गया है। यहां  भरपूर  हरियाली  भी है। सैकड़ों की तादाद में उधना रेलवे स्टेशन के स्पैरो जोन में गौरैयों को चहकती-फुदकती है। सुबह से शाम तक उधना स्टेशन परिसर  झुंड में गौरैयों की अठखेलियां और चीं-चीं की आवाज से गुलजार रहता है। ऐसा लगता है जैसे उधना रेलवे स्टेशन परिसर पर सिर्फ और सिर्फ गौरैयों रहती  हो। सच भी है उधना रेलवे परिसर गौरैयों का घर है जहां वर्षो से ये चहकती-फुदकती चली आ रही है। जहां गौरैया  शहर और गांव से गायब हो रही है वहीं रेलवे स्टेशन परिसर में सैकड़ों की तादाद में पाया जाना और उनका संरक्षण करना बड़ी बात है। उधना रेलवे स्टेशन परिसर को  गौरैया के वास को देख स्पैरो जोन बना देना काबिले तारीफ है।

 उधना रेलवे स्टेशन स्पैरो जोन की तरह देश के सभी रेलवे स्टेशन को स्पैरो जोन बना  देना चाहिये। क्योंकि लगभग हर रेलवे स्टेशनों पर गौरैया सहित दूसरी चिड़ियों का सुरक्षित बसेरा है। यहां उन्हें आहार और आवास के लिए समुचित व्यवस्था होती है,जो पूरी तरह से सुरक्षित भी है। रेलवे स्टेशन के पास गोदाम होने से आहार की कमी नहीं रहती साथ ही लोगों द्वारा फेंका गया भोजन आदि भी मिल जाता है। यहां पानी की कमी नहीं रहती है। आवास की कमी स्टेशन परिसर पूरी करता है। प्लेटफॉर्म के शेड और स्टेशन की खुली इमारतों के वेंटिलेशन और सुरक्षित खोह में ये रहते हैं। सबसे अहम बात यह है कि घरेलू गौरैया का स्वभाव होता है इंसान के बीच रहने का, और रेलवे स्टेशन पर हर वक्त लोग रहते हैं। ऐसे में वह खुद को और सुरक्षित महसूस करती है।

वहीँ, सूरत का उधना जंक्शन रेलवे स्टेशन देश का पहला रेलवे स्टेशन बन गया है जिसने ‘पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और जलवायु कार्रवाई के लिए एक ग्रीन रेलवे स्टेशन’ के रूप में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है। 2019 में अपने गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘हार्ट्स एट वर्क फाउंडेशन’ के माध्यम से उधना जंक्शन रेलवे स्टेशन को गोद लिया और इसे एक हरित रूप देने का एकमात्र मिशन पूरा किया। तब से, उधना रेलवे स्टेशन पर कई पर्यावरण संरक्षण परियोजनाएं चलाई गई हैं। स्टेशन पर एक गौरैया क्षेत्र के अलावा, 50 से अधिक अनूठी पेंटिंग और एक अनूठी हरित गैलरी है जिसमें 16,000 से अधिक आगंतुकों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में शिक्षित करने के लिए चित्र प्रदर्शित किए गए हैं।

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संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

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