वायु प्रदूषण पर जीरो टॉलरेंस, हॉटस्पॉट पर हो कार्रवाई

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एनसीआर राज्यों के समन्वित प्रयासों की समीक्षा की…राज्यों ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए संबंधित पक्षों की भागीदारी और व्यवहार में परिवर्तन पर ध्यान देते हुए विस्तृत और व्यावहारिक कार्य-योजनाएं तैयार कीं…एसपीसीबी को प्रदूषण हॉटस्पॉट पर ध्यान देना चाहिए और नियमों का पालन न करने…

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए एनसीआर राज्यों के समन्वित प्रयासों की समीक्षा की…राज्यों ने वायु प्रदूषण रोकने के लिए संबंधित पक्षों की भागीदारी और व्यवहार में परिवर्तन पर ध्यान देते हुए विस्तृत और व्यावहारिक कार्य-योजनाएं तैयार कीं…एसपीसीबी को प्रदूषण हॉटस्पॉट पर ध्यान देना चाहिए और नियमों का पालन न करने वाले प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों के खिलाफ ‘ज़ीरो-टॉलरेंस’ नीति अपनानी चाहिए: श्री भूपेन्द्र यादव

नई दिल्ली, 3 सितंबर। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने एनसीआर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए राज्यों के समन्वित प्रयासों की समीक्षा करते हुए प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष ध्यान देने और नियमों का उल्लंघन करने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाये जाने पर जोर दिया । उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल जागरूकता अभियान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रभावी कार्रवाई और सख्त प्रवर्तन भी जरूरी है।

वायु प्रदूषण से निपटने में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एनसीआर के राज्य सरकारों द्वारा तैयार की गई विस्तृत कार्ययोजनाओं का स्वागत करते हुए मंत्री ने राज्यों द्वारा की गई विशिष्ट पहलों को उजागर किया और अन्य राज्यों से सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को अपनाने तथा उन्हें दोहराने का आग्रह किया। श्री यादव ने अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाकर और सभी हितधारकों को इसमें शामिल करते हुए सूचना, शिक्षा और प्रचार (आईईसी) गतिविधियों तथा व्यवहार परिवर्तन संबंधी प्रचार को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। एनसीआर की राज्य सरकारों के साथ बातचीत के दौरान मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वायु प्रदूषण से निपटने के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समन्वित और केन्द्रित हितधारक सहभागिता आवश्यक है। मंत्री ने विभिन्न राज्यों द्वारा प्रस्तावित आईईसी गतिविधियों की समीक्षा की और इस बात पर जोर दिया कि अधिक व्यापक पहुंच और प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए इन गतिविधियों को समन्वित तरीके से संचालित किया जाना चाहिए।

श्री यादव ने प्रस्ताव रखा कि केन्द्रीय कृषि, पर्यावरण और शहरी विकास मंत्री अपने-अपने राज्य समकक्षों के साथ बैठकें कर वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए समन्वित रणनीतियां तैयार करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को वायु प्रदूषण के चिन्हित हॉटस्पॉट पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए और इनके शमन के लिए व्यावहारिक एवं प्रभावी कार्ययोजनाएं तैयार करनी चाहिए।

राज्य के अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान मंत्री ने जोर देकर कहा कि “गैर-अनुरूपता वाली प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयों से ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाते हुए सख्ती से निपटा जाना चाहिए।” उन्होंने उल्लंघनों और चूक के लिए जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अधिक जवाबदेही और अनुपालन सुनिश्चित करने के उपाय के रूप में गैर-अनुरूपता वाले हितधारकों के नाम सार्वजनिक करने को भी अपनाया जाना चाहिए।

मंत्री ने जोर दिया कि केवल सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियां ही पर्याप्त नहीं होंगी और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रभावी कार्यान्वयन एवं प्रवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि पहलों और संबंधित राज्यों द्वारा की गई कार्रवाई की प्रगति का आकलन करने के लिए सितम्बर में केन्द्रीय मंत्री के स्तर पर एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। उन्होंने एनसीआर की राज्य सरकारों को आश्वस्त किया कि भारत सरकार वायु गुणवत्ता प्रबंधन के उनके प्रयासों को पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।मंत्री ने पिछले एक वर्ष के दौरान 25 से अधिक बैठकें आयोजित कर एनसीआर में नगर निकायों की व्यक्तिगत वायु गुणवत्ता प्रबंधन योजनाओं और लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उनके द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा की है। इसके परिणामस्वरूप, राज्यों की व्यक्तिगत कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इन योजनाओं में वायु प्रदूषण के चिन्हित स्रोतों से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर की जाने वाली विभिन्न गतिविधियों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, आज हितधारक सहभागिता योजना की भी समीक्षा की गई।

बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के सचिव, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के अध्यक्ष तथा एमओईएफसीसी और सीएक्यूएम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। राज्य सरकारों की ओर से पर्यावरण मंत्री और सचिवों के साथ-साथ दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अध्यक्ष एवं सदस्य सचिव उपस्थित रहे। इसके अलावा, पंजाब के कृषि मंत्री एवं कृषि सचिव तथा पर्यावरण सचिव और राजस्थान के अपर मुख्य सचिव एवं पर्यावरण सचिव ने भी बैठक में भाग लिया।

About the Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

संयोजक

 हमारी गौरैया और इनवारमेंट वैरियर्स

Hamari Gauraiya and Environment Warriors

*सम्पादक -डॉ .लीना

*सहायक सम्पादक -निशांत रंजन

उद्देश्य

विश्व गौरैया दिवस: एक साझा संकल्प

20 मार्च 2010 को जब विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत हुई, तो मकसद साफ था—इस नन्हीं जान को लुप्त होने से बचाना। इस मुहिम को मजबूती देते हुए दिल्ली सरकार ने 15 अगस्त 2012 और बिहार सरकार ने 16 अप्रैल 2013 को गौरैया को अपना राजकीय पक्षी घोषित किया। तब से लेकर आज तक, सरकारी संस्थाओं और निजी संगठनों के साझा प्रयासों से गौरैया की ‘घर वापसी’ का अभियान निरंतर जारी है।

घर-आँगन, खेत-खलिहान में चहकने-फुदकने वाली गौरैया की घटती संख्या को रोकना और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना। उद्देश्य है सभी गौरैया संरक्षकों का …इसमें हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा(Hamari Gauraiya and Environment Warriors) भी शामिल है।

प्रधानमंत्री द्वारा गौरैया को संरक्षित करने को लेकर ‘मन की बात’ में कई बार सन्देश दिया गया हैं :- “विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नन्हीं गौरैया को हमारे पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि शहरीकरण और प्रदूषण के कारण घटती इनकी संख्या पर्यावरण असंतुलन का संकेत है, इसलिए घरों में दाना-पानी रखकर और घोंसले बनाकर इनके प्रति स्नेह और जिम्मेदारी निभाएं।

हमारी पहल: पूर्णतः निस्वार्थ और जनहित में

यह वेबसाइट पूरी तरह से अवैतनिक,जनहित और सामाजिक सरोकार को समर्पित है। हमारा मंच किसी व्यक्ति या संगठन के लाभ के लिए नहीं, बल्कि केवल गौरैया और पर्यावरण संरक्षण की आवाज बनने के लिए है।

हमें आप लिख सकते हैं …आप हमें  📩 ईमेल करें: ilovesparrow68@gmail.com

🐦 आपकी भागीदारी जरूरी है: अगर आपके पास गौरैया और पर्यावरण संरक्षण संरक्षण से जुड़े अनुभव, प्रेरक कहानियाँ, कविताएँ, गीत या शोधपरक आलेख हैं, तो हमें ज़रूर भेजें।

www.ilovesparrow.com वेबसाईट का उद्देश्य साफ़ है घर -घर गौरैया संरक्षण की पहल हो..साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण हो।

सम्पादक : डॉ लीना, सहायक सम्पादक : निशांत रंजन