संजय कुमार/ नन्ही गौरैया हो या कोई भी चिड़िया, उड़ते हुए सामने आने वाली बाधा को पहचान कर बच निकलने की अद्भुत क्षमता रखती है। जो उसे प्रकृति से मिली है। लेकिन तेज उड़ान, कम रोशनी, कांच की इमारत, पतंग का मांझा और घनी वनस्पति के बीच कभी-कभी यह क्षमता चूक जाती है और नन्ही गौरैया घायल हो जाती है।
मस्तिष्क, संतुलन और शरीर नियंत्रण का अद्भुत संगम
गौरैया की उड़ान केवल पंखों की ताकत नहीं है। यह दृष्टि, मस्तिष्क, संतुलन और शरीर नियंत्रण का अद्भुत संगम है। अधिकांश पक्षियों की आँखें सिर के दोनों ओर होती हैं, जिससे उन्हें 300 डिग्री से ज्यादा का व्यू मिलता है। इसी कारण झुंड में दस हों या सौ, गौरैया एक साथ उड़ते हुए भी आपस में नहीं टकरातीं। खतरा दिखते ही वह पंख और पूंछ का कोण बदलकर सेकेण्ड में दिशा बदल लेती है – ऊपर, नीचे, दाएं-बाएं। पेड़ों की शाखाओं के बीच खाली जगह का अंदाजा लगाकर वह लगातार अपनी उड़ान में सुधार करती रहती है और बिना रुके सीधे अपने छोटे से होल वाले घोंसले में भी प्रवेश कर जाती है। आँखों से मिली जानकारी मस्तिष्क तक इतनी तेजी से पहुँचती है कि उसका मुड़ना हमें सहज लगता है। झुंड में उड़ते समय एक गौरैया मुड़ी तो पास वाली भी गति-दिशा बदल लेती है, और पूरे झुंड में लहर जैसी सुंदर गति बनती है। हाँ, जब शिकरा जैसा शिकारी अचानक आता है तो कभी-कभी आपस में टक्कर भी हो जाती है।
सबसे बड़े खतरे मानव निर्मित हैं

कांच की खिड़की पारदर्शी होने से दिखती नहीं, या उसमें पेड़-आकाश का प्रतिबिंब देखकर गौरैया भ्रमित हो जाती है। कभी वह अपनी परछाई को दूसरी गौरैया समझकर चोंच मार-मार कर अपने को घायल कर लेती है। पतंग का मांझा, बिजली के बारीक तार दूर से दिखते ही नहीं, और तेज उड़ान में पंख, गर्दन या पैर फंसने से मौत तक हो जाती है। गौरैया सिर्फ आँखों से नहीं, पंखों पर हवा के दबाव से भी रास्ता नापती-बदलती है, बिल्कुल हवाई जहाज की तरह। हवा के झोंके में भी वह तुरंत संतुलन संभाल लेती है। प्रकृति ने इस 30 ग्राम की नन्ही जान को रडार जैसी आँखें और फाइटर जेट जैसी फुर्ती दी है। पर कांच, धारदार मांझा, तेज रोशनी और धुएं जैसी हमारी बनाई चुनौतियाँ उसकी इस प्राकृतिक इंजीनियरिंग पर भारी पड़ जा रही हैं। गौरैया मानव निर्मित खतरे से बचाने के लिए इंसान को ही पहल करनी होगी, शीशे वाली खिड़की या दीवार पर कपडा/पर्दा लगा दें, पतंगबाजी के लिए धारदार मांझे पर रोक लगायें और घोंसले के पास खुली जगह रहने दें।
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