सुबह-सुबह की बात है,
भीगी-भीगी सी रात है,
पत्तों पर ठहरी बूँदें,
हवा में मीठी-सी बात है।
दो चिड़ियाँ बैठी डाल पर,
जैसे कोई गीत सुनाएँ,
एक कहे – “चल उड़ चलें…”
दूजी कहे – “पहले दाना खाएँ!”
न कोई शिकवा, न कोई डर,
न कल की कोई चिंता है,
आज की इस छोटी-सी दुनिया में,
बस प्यार ही प्यार बचा है।
तुम पानी रख देना आँगन में,
मैं थोड़ा-सा दाना डालूँ,
इन नन्हीं आँखों की सुबह में,
अपनी भी सुबह निहारूँ।
सुबह-सुबह की बात है,
भीगी पत्तियों का साथ है,
दो चिड़ियाँ, एक पेड़ और हम
बस इतनी-सी तो कायनात है…!
-संदीप झा,वरिष्ठ पत्रकार















