संजय कुमार/ गौरैया जब उदास अवस्था में होती है या तनाव में रहती है तो पूंछ को बार-बार पटकती है, हालाँकि कई बार उसे ख़ुशी के क्षण में भी ऐसा करते देखा जा सकता है। गौरैया की पूंछ ही उसकी “बॉडी लैंग्वेज” है। वो बोल नहीं सकती, इसलिए पूंछ हिलाकर ही साथियों को अपने भाव को बताती है। गौरैया पूंछ क्यों पटकती है? इस सवाल पर कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि तनाव या उदास होने पर या गौरैया डरी हुई हो, भूखी हो, बीमार हो या अपने झुंड से अलग हो जाए तो वो बार-बार पूंछ ऊपर-नीचे पटकती है। मतलब साफ़ है तनाव के समय वह ऐसा करती हैं। जैसे हम इंसान तनाव में पैर हिलाते हैं, वैसे ही गौरैया पूंछ पटकती है।
वहीँ, खुशी या एक्साइटमेंट में भी नर गौरैया जब मादा को रिझाने के लिए नाचता है, या जब उसे मनपसंद दाना मिल जाए, या मन में ख़ुशी हो – तब भी वो पूंछ पटकती / फड़फड़ाती है।
ख़ुशी का इजहार या खतरा दिखे तो पूंछ खड़ी करके पटकती है,जैसे कहती हो सावधान हो जाओ खतरा है। नहाने या धूल स्नान के बाद पंख झाड़ने के लिए भी करती है। सवाल यह भी है कैसे पहचानें कि गौरैया उदास है या खुश? सिर्फ पूंछ देखकर नहीं समझ सकते हैं। गौरैया जब चुपचाप एक जगह अपने को समेटे बैठी ही, चहकती, फुदकती न हो या अपने साथी गौरैया या झुण्ड से अलग हो तो उसके चेहरे के भाव बता देते हैं कि गौरैया खुश नहीं है तनाव में हैं। देखा जाये तो प्रकृति ने हर छोटी-बड़ी चिड़िया को भी अपना सेंस दिया है। अपनी बातों को संकेत में दुसरे को बताने को लेकर।















