(विश्व हाथी दिवस) विश्व हाथी दिवस पर आज का सबसे बड़ा सवाल है आखिर लोहे की जंजीरों में कैद क्यों हैं हाथी ? सवाल को खंगाला है जिला धमतरी, छत्तीसगढ़ के हाथी शुभचिंतक वैभव जगने ने ।
आज पूरा भारत, केंद्र हो या राज्य—विश्व हाथी दिवस मनाने के लिए तत्पर है। जगह-जगह कार्यक्रम होंगे, भाषण होंगे, जागरूकता अभियान चलेंगे और हाथियों के संरक्षण की बातें होंगी। लेकिन आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है—क्या हम वास्तव में विश्व हाथी दिवस उचित तरीके से मना रहे हैं?
क्या हमारे राष्ट्रीय विरासत पशु हाथी आज सच में सुरक्षित हैं? अगर मुझे इसका उत्तर देना हो, तो मैं कहूंगा—नहीं। हमारे राष्ट्रीय विरासत पशु आज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।
इसके पीछे कई गंभीर कारण हैं—
- जंगलों की अवैध कटाई
- जंगलों में अवैध अतिक्रमण
- अवैध शिकार
- हाथियों के प्राकृतिक आवासों का लगातार नष्ट होना
- मानव गतिविधियों के कारण बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष
लेकिन इन सबके बीच सबसे अधिक चिंतन का विषय यह है कि हमारे राष्ट्रीय विरासत पशु हाथी आज भी लोहे की जंजीरों में कैद हैं।
आखिर उन्होंने कौन-सा अपराध किया है? जिस देश को आजाद हुए लगभग 80 वर्ष होने जा रहे हैं, उसी देश में हम हाथी को कभी गणेश भगवान के रूप में पूजते हैं, तो दूसरी ओर उसी हाथी को मंदिरों में जंजीरों से बांधकर रखते हैं।
क्या यह वास्तव में हाथी के प्रति हमारी श्रद्धा और सम्मान है?
मंदिरों में कैद हाथी, सड़कों पर इस्तेमाल किए जाने वाले हाथी और मनोरंजन या सवारी के लिए उपयोग किए जाने वाले हाथी—इन सभी की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। विश्व हाथी दिवस केवल एक दिन कार्यक्रम आयोजित करने का नाम नहीं है।
यह दिन हमें अपने राष्ट्रीय विरासत पशु के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाता है। हमें यह तय करना होगा कि हाथी केवल पूजा और पोस्टर का विषय न बने, बल्कि उसे सम्मान, स्वतंत्रता, सुरक्षा और प्राकृतिक जीवन भी मिले।
एक हाथी शुभचिंतक होने के नाते मैं बस इतना कहना चाहूंगा—भारत में हमारे राष्ट्रीय विरासत पशु हाथियों की स्थिति आज भी चिंताजनक है। आइए, इस विश्व हाथी दिवस पर केवल हाथियों के संरक्षण की बातें न करें, बल्कि उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा, अवैध गतिविधियों पर रोक और कैद हाथियों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करें।
हाथी बचेंगे, जंगल बचेंगे और तभी हमारा पर्यावरण बचेगा।
हाथी शुभचिंतक
वैभव जगने, जिला धमतरी, छत्तीसगढ़















